अस्सी प्रतिशत





''नीलम अवाक से उस अफसर का मुँह देख रही थी, जिसने उसके ऑफिस में चार्ज लेते ही सबको बुला कर किसी भी प्रकार के लेन देन पर सीधे एफआईआर करवाने की बात कही थी. सच है, सबका वश इन तथाकथित छोटी मछलियों पर ही चलता है. बड़ी मछलियाँ तो बस ये सब करना अपना हक और अधिकार समझती हैं.''

- सीमा 'मधुरिमा' लखनऊ 
आज नीलम बेहद परेशान थी. पिछले पाँच महीने से उसके ऑफिस में अपने कार्य से अनुपस्थित चल रही डॉक्टर का स्थानांतरण हो गया था और उस डॉक्टर के पिताजी दबाब बना रहे थे उसके कार्यमुक्त किये जाने का.
चूंकि वो जानती थी कि न ही उस डॉक्टर ने पिछले पांच महीने कहाँ थी, का उसके ऑफिस में कोई सूचना ही दी है या न ही किसी तरह की बीमारी की ही कोई सूचना दी है, ऊपर से ये स्थानांतरण, उसके मन में तरह तरह की आशंकाएं घर करने लगी.

उसे इस ऑफिस में आये अभी एक वर्ष ही हुए थे, तब ये डॉक्टर मातृत्व अवकाश पर थी, जिसकी समाप्ति पर बच्चा देखभाल अवकाश स्वीकृत हुआ था और जब उसकी अवधि भी पूरी हो गयी. वो अपनी ड्यूटी जॉइन करने नहीं आयी और अब स्थानान्तरण आदेश, जो उसके पिताजी बिना ऑफिस में जॉइन करे ही कार्यमुक्ति आदेशित करने का दबाब बना रहे थे. उसको विश्वस्त सूत्रों से पता चला था कि उक्त डॉक्टर को यूटेरस का कैंसर हो गया था, पर कभी भी उसने उसके ऑफिस से किसी भी प्रकार की चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा भी नहीं किया.

जो रही सही कसर थी. इस खबर ने उसकी नींद उड़ा दी कि वो डॉक्टर वहाँ भी केवल पेपर पर ही जॉइन करेगी और इसका वेतन निकलता रहेगा.  नीलम ने अपने अफ़सर से सब बताया. उस समय वहाँ बैठी एक दूसरी महिला अफसर बोल उठी, नीलम जी जब अफसरों को कोई ऐतराज नहीं तो आपको क्यों दिक्कत है. नीलम ने जबाब दिया, मेम सरकारी पैसे की बर्बादी नहीं है ये? इस पर वह बोलीं, आप नीलम जी किस किस को सुधारोगी और क्यों आप कर ही क्या पाओगी, यहाँ अस्सी प्रतिशत ऐसे ही लोग हैं? जहाँ आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं है, वहाँ और दूसरे प्रकार का भ्रष्टाचार है. उनकी बात पर नए जॉइन किये अफसर ने मुहर लगाते हुए बोला और नीलम जी इन्होंने तो प्रतिशतता बहुत कम बतायी. वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा है.

नीलम अवाक से उस अफसर का मुँह देख रही थी, जिसने उसके ऑफिस में चार्ज लेते ही सबको बुला कर किसी भी प्रकार के लेन देन पर सीधे एफआईआर करवाने की बात कही थी. सच है, सबका वश इन तथाकथित छोटी मछलियों पर ही चलता है. बड़ी मछलियाँ तो बस ये सब करना अपना हक और अधिकार समझती हैं.
(डिजीटल न्यूज़ सर्विस नेटवर्क )  


  

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