बीजेपी पदाधिकारी ने बताया 'झूंठ फैलाया जा रहा है कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ'



70 साल में कुछ नहीं हुआ. ये स्पष्ट तौर पर झूठ है और इससे तैयार हुई मानसिकता देश के लिए ही नुकसानदायक होगी. इस सरकार ने टैक्सपेयर का 4,000 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किया है और अब यह ट्रेंड बन जाएगा. काम कम, प्रचार ज्यादा. मोदी पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिसने सड़कें बनवाई हैं- कुछ सबसे अच्छी सडकें जिन पर मैंने सफर किया है, वो मायावती या अखिलेश यादव ने बनवाई थीं. यह बात बीजेपी के ही एक पदाधिकारी ने सोशल मीडिया पर शेयर की है. 

विधि प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष सतेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने लिखा है कि भारत में आईटी क्षेत्र 1990 के दशक से ही विकसित होने लगा था. आज के हालात के आधार पर अतीत में किए गए कामों को मापना और पुराने नेताओं को कमतर साबित करना आसान है. मसलन, कोई पूछेगा, ‘क्यों कांग्रेस 70 सालों में शौचालय नहीं बना पाई? इतना भी नहीं कर सके वो.’ ये बात तर्कसंगत लगती है और मैं भी तब तक इस पर यकीन करता था, जब तक मैंने भारत का इतिहास पढ़ना शुरू नहीं किया था. 

उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर पोस्ट में बताया है कि 1947 में जब आजादी मिली, तब हम बेहद गरीब देश थे. हमारे पास देश का आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए न संसाधन थे, न पैसा. इसी समस्या से निपटने के लिए नेहरू ने समाजवाद का रास्ता चुना और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) शुरू किए. हमारे पास स्टील बनाने की क्षमता ही नहीं थी, इसलिए रूस की मदद से रांची में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन स्थापित किया गया, जिससे भारत में स्टील बनाने की मशीनें बनना शुरू हुईं. यानी बिना इसके हमारे पास स्टील नहीं होता, यानी कोई आधारभूत ढांचा नहीं. यानी एजेंडा यह था कि आधारभूत उद्योग और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाये. 

उन्होंने लिखा है उस समय लगातार अकाल पड़ते थे, साल दो साल में ऐसा होता कि बड़ी संख्या में लोग भूखों मर जाते. उस समय प्राथमिकता लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराना था, शौचालय किसी लक्जरी की तरह था, जिसकी किसी को परवाह नहीं थी. इसके बाद हरित क्रांति हुई और 1990 के दशक तक अन्न की कमी लगभग खत्म ही हो गयी- अब तो हालत यह है कि इसकी अधिकता से समस्या खड़ी है. तो शौचालय वाली बात इस तरह है कि आज से 25 साल बाद आप कहें कि मोदी देश के सब घरों में एयरकंडीशनर क्यों नहीं लगवा सकते थे. आज की तारीख में यह लक्जरी लगता है, ठीक ऐसे ही उस समय शौचालय लक्जरी थे. हो सकता है कि ऐसा करीब 10-12 साल पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन यह कहना कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ, सरासर झूठ है.
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News Digital India 18

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