कर्नाटक में बड़ी संख्या में मिले वोटर ID, चुनाव प्रक्रिया पर खतरा




''बेंगलुरु में एक फ्लैट से करीब 10 हजार फर्जी वोटर कार्ड मिलने से बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस बीजेपी को जिम्मेदार बताये, बीजेपी कांग्रेस को, लेकिन लोकतंत्र का तमाशा अवश्य बन रहा है. इस प्रकार से पारदर्शी व स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया खतरे में नजर आ रही है और जब चुनाव प्रक्रिया ही खतरे में है तो लोकतंत्र कमजोर होगा ही.'' 



12 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने हैं, लेकिन उससे पहले ही राजधानी बेंगलुरु के एक अपार्टमेंट से करीब 10 हजार फर्जी वोटर कार्ड मिले हैं. घटना ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को हिला कर रख दिया है. कर्नाटक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने मंगलवार रात साढ़े ग्यारह बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 9746 वोटर आईडी कार्ड बरामद किए गए हैं. इन्हें छोटे बंडलों में बांधकर और लपेटकर रखा गया था. हर बंडल पर फोन नंबर और नाम लिखा गया था. हालांकि चुनाव आयोग ने अभी ये साफ नहीं किया है कि वोटर आईडी फर्जी हैं या असली. संजीव कुमार ने कहा है कि मामले में एफआईआर दर्ज हो गई है और जांच की जा रही है. 

घटना को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर कई आरोप लगाए हैं और आर.आर. नगर सीट पर चुनाव रद्द करने की मांग की है तो वहीं कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी घटना के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया है. सुरजेवाला ने कहा ‘बीजेपी चुनाव हार रही है और इसलिए यह मिडनाइट ड्रामा कर रही है. हम बीजेपी से पूछना चाहते हैं कि वह बताए कि फ्लैट संख्या 115 की मालकिन कौन है? उस फ्लैट का किराएदार कौन है? मंजुला अंजामरी कौन है?’

कांग्रेस नेता ने कहा ‘मंजुला बीजेपी की पूर्व कार्पोरेटर हैं और वह इस फ्लैट की मालकिन हैं. उन्होंने यह फ्लैट अपने गोद लिए बेटे राकेश को दे रखा है, जिन्होंने बीजेपी के टिकट से 2015 में निगम पार्षद का चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था. जबकि बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि मंजुला अंजामरी का बीजेपी से कुछ लेना देना नहीं है. वह छह साल पहले ही बीजेपी छोड़ चुकी है. 

कांग्रेस बीजेपी को जिम्मेदार बताये, बीजेपी कांग्रेस को, लेकिन लोकतंत्र का तमाशा अवश्य बन रहा है. इस प्रकार से पारदर्शी व स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया खतरे में नजर आ रही है और जब चुनाव प्रक्रिया ही खतरे में है तो लोकतंत्र कमजोर होगा ही.




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