राज्यपाल के फैसले से संवैधानिक पद का सोशल मीडिया में उड़ाया जा रहा जम कर मजाक









”पिक्चर अभी ख़त्म नहीं हुई है. जो दांव बीजेपी ने खेला है, वह उसे भारी भी पड़ सकता है. गेंद अभी सुप्रीम कोर्ट के पाले में है. कल सुप्रीम कोर्ट ने वो पत्र मांगे हैं, जो दोनों पार्टियों के नेताओं ने माननीय राज्यपाल महोदय को दिए थे. क्या बीजेपी ने बहुमत के लिए 104 विधायकों के अलावा भी नाम दिए थे. अगर नहीं दिए थे, तो सुप्रीम कोर्ट का क्या निर्णय आता है, देखने वाली बात होगी. कुछ उलट-पुलट भी हो सकता है.” 




कांग्रेस के 2 विधायक लापता बताये जा रहे हैं, लेकिन इस बीच निर्दलीय 2 विधायक कांग्रेस जेडीएस के साथ धरना में शामिल रहे हैं. 

कुछ ख़ास बयान  

  • पीएम से डर लगता है. देश में डर का माहौल है. ऐसा तानाशाही में होता है.  -राहुल गांधी 

  • लोकतंत्र की ह्त्या कांग्रेस जेडीएस ने मिल कर की. -अमित शाह 

  • नैतिकता हमें न दिखाएँ. -रविशंकर प्रसाद 



इसी के साथ राज्यपाल के फैसले पर सोशल मीडिया में जम कर आलोचना हो रही है. लोकतंत्र में एक संवैधानिक पद का किस कदर मजाक बनाया जा रहा है. 

संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए कि एक संवैधानिक पद की गरिमा पर उंगलियाँ उठें.

देखिये लोग क्या क्या कह रहे हैं- 

पत्रकार श्री रंजन यादव जी लिख रहे हैं ”आज मैं एक लकड़ी जलाकर कर्नाटक के राज्यपाल का दहन करूँगा। इस आदमी ने भारतीय संविधान का बलात्कार किया है। लोकतंत्र की अवधारणा बहुमत पर टिकी है, इस आदमी ने इस धारणा को अपनी रखैल बना दिया।”




Sandip Naik जी की वाल से पत्रकार सुश्री ममता यादव जी ने शेयर किया है 
कुल मिलाकर हम मंडी, मीडिया, प्रशासन, वेश्या और बाकी सबको कोसते हैं कि बिकाऊ हैं, पर चुने हुए विधायक, सांसद और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से बड़ा और घटिया माल कोई नहीं, जो भारत में बिक जाता हो.


बन्द करो चुनाव और हमारे पसीने की कमाई का उजाड़ना. उन्होंने लिखा है ‘सरे बाजार मिश्र और यूनान के गुलामों की तरह बिक जाए – उन्हें जूते मारो.’


सवाल किया है ‘कौन आजाद हुआ, किसके माथे से स्याही छूटी !’




पत्रकार श्री आलोक बाजपेयी जी लिख रहे हैं ‘राज्यपाल घर के पिछवाड़े रखी बाँस की किमची जैसा अनुपयोगी होता है, पर दो-चार साल में ड्रेनेज फँसने पर क्लीयर करने के काम आ ही जाता है। #आलोक_बाजपेयी_कहिन

बीजेपी के ही एक पदाधिकारी श्री विजय सिंह बैस जी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अंगद वाले बयान को सामने ला रहे हैं. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा है  -‘बीजेपी का कोई कदम हलका नहीं होता है, हर कदम अंगद का कदम होता है, कोई हिला भी नहीं पायेगा। 

उल्लेखनीय है इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश में जम कर हंगामा हुआ है.




श्री चन्द्र प्रकाश शर्मा जी महाभारत के एक ख़ास प्रसंग की याद दिलाते हुए बता रहे हैं कि इश्क और जंग में सब जायज होता है, उनका आशय है कि चुनाव में भी सब जायज होता है. उन्होंने लिखा है -”महाभारत युद्ध में कर्ण के रथ का चक्का धंस गया तो कर्ण ने नैतिकता की दुहाई दी, इस पर श्री कृष्ण ने क्या कहा था ये सर्वविदित है.”

श्री प्रेम प्रदीप जी इसे बीजेपी की बड़ी गलती बता रहे हैं. वह लिखे हैं- “बीजेपी ने सेफ गेम को, अति आतुरता में हाईली रिस्की मोड में ला दिया. 
विपक्षियों के सिरों की जगह अपना ही सिर दॉव पर लगा बैठे..शाहजी 

श्री आलोक बाजपेयी जी ने बीजेपी विधायकों की चिंता करते हुए लिखा है- ‘अरे कोई राहुल गांधी को बताओ रे कि जितने सौ करोड़ रुपयों में मोदी-शाह जेडीएस के दस-बारह विधायकों को विश्वास मत के समय एब्सेंट कराएँगे, उससे आधे रूपये बाँटकर 20 भाजपा विधायक एब्सेंट करवाए जा सकते हैं. आखिर उन बेचारों के भी तो बाल-बच्चे हैं.’

श्री भूपेन्द्र गुप्ता आगम जी शपथ ग्रहण समारोह को कपट ग्रहण समारोह बताते हुए लिख रहे हैं. कपट ग्रहण समारोह में घर के लोग ही नहीं पहुंचे. उनका आशय प्रधानमन्त्री मोदी और अमित शाह से है.

श्री अरुण यादव जी बीजेपी अध्यक्ष की गज़ब तारीफ़ किये हैं. उन्होंने लिखा है-‘इस देश में वही होगा, जो मोटा भाई चाहेंगे, फिर जिसको जो उखाड़ना है उखाड़ ले.’





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