सरकारों को एंटी इन्कम्वेंसी से बचाने विलेन का रोल निभा रहा है नोटा, कर्नाटक में भी हुआ साबित


नोटा ने बचाया अन्यथा हार सकते थे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया






''जैसा कि हमने पूर्व में लिखा है वर्तमान सरकारों को एंटी इन्कम्वेंसी से 

बचाने का रोल निभा रहा है नोटा. यह बात हाल में कर्नाटक में भी 

साबित हो गई है. यहाँ कर्नाटक चुनावों में बीजेपी को बहुमत न मिलने में 

नोटा यानि "नन ऑफ द अबव" ने विलेन का अहम रोल अदा किया.'' 

कर्नाटक चुनावों में 6 से ज्यादा सीटें ऐसी थीं, जहां हार का अंतर नोटा में पड़े वोट्स से भी कम था. खास बात यह रही कि नोटा के चलते बीजेपी इन सीटों पर दूसरे नंबर रही.  

बाप रे ! बच गए  'thanks to you nota'

बीजेपी के सूत्र मानते हैं कि कर्नाटक में बहुमत का समीकरण नोटा के कारण बिगड़ा है. कर्नाटक चुनाव में 0.9 फीसदी (3,22,829) वोटरों ने नोटा पर बटन दबाया था, यानि वे किसी भी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देना उचित नहीं समझे. दक्षिण बंगलूरू सीट पर नोटा पर 15,829 सबसे ज्यादा वोट पड़े. वहीं 28 दूसरी सीटों पर 2000 से ज्यादा वोट नोटा को पड़े. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि जहाँ नोटा को अधिक वोट मिले वहां अधिकांश सीटें शहरी क्षेत्रों की थीं. 

आलंद, बादामी, गडग, हिरेकरुर, कुंडगोल, मस्की, पावागडा और देवार हिप्पर्गी सीटें ऐसी रहीं, जहां एंटी इन्कम्वेंसी के चलते, जो लोग नाराज थे, वह बीजेपी को वोट न देकर नोटा को दे दिए. यदि एंटी इन्कम्वेंसी वाले ये वोट बीजेपी को मिल जाते, तो वह जीत हासिल कर सकती थी, लेकिन नोटा को ज्यादा वोट मिलने से जीत बीजेपी के हाथ से फिसल कर कांग्रेस या जेडीएस के हाथों में पहुंच गई. 

खुद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बादामी सीट पर जीत नोटा के चलते हासिल हुई है। बादामी में सिद्धारमैया को 67599 वोट पड़े, जबकि बीजेपी के श्रीरामुलु को 65903 वोट पड़े। मात्र 1696 वोटों से सिद्धारमैया को जीत हासिल हुई, वहीं नोटा में 2007 वोट पड़े. अब यदि यह वोट नोटा को न जाकर विपक्षी पार्टी बीजेपी को मिल जाते तो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की हार तय थी.  

वहीं देवार हिप्पर्गी विधानसभा सीट पर जेडीएस के प्रत्याशी को 38802 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी को 38712 वोट मिले और मात्र 90 वोटों से बीजेपी हार गई, जबकि वहां 935 वोट नोटा को पड़े. 

कुछ ऐसा ही गडग विधानसभा सीट पर देखने को मिला, जहां 77699 वोट कांग्रेस को पड़े, जबकि दूसरे नंबर पर रही 75831 वोट बीजेपी को मिले. इस सीट पर हार का अंतर 1868 वोट का रहा और नोटा पर 2007 वोट डाले गए. हिरेकरुर सीट का आंकड़ा भी कम दिलचस्प नहीं है. यहां कांग्रेस को 72461 वोट पड़े, जबकि बीजेपी प्रत्याशी को 71906 वोट मिले. यहां जीत का अंतर 555 वोटों का रहा और नोटा में 972 वोट पड़े. 

कर्नाटक की कुंडगोल सीट पर पहले नंबर पर कांग्रेस रही, यहां कांग्रेस प्रत्याशी को 64871 मत मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 64237 वोटों के साथ 634 मतों से हार देखने को मिली. वहीं नोटा में 1032 वोट डाले गए. ऐसा ही कुछ कर्नाटक की मस्की सीट पर देखने को मिला. मस्की सीट पर कांग्रेस ने 603887 वोटों के साथ जीत हासिल की, वहीं बीजेपी को 60174 वोटों के साथ 213 वोटों से हार हुई. इस सीट पर 2049 लोगों ने नोटा का बटन दबाया. 

बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) (जेडीएस) के अलावा राज्य के चुनाव में हिस्सा लेने वाली कई ऐसी पार्टियां भी रहीं, जिसे नोटा से भी कम वोट मिले हैं. कर्नाटक चुनाव में बीएसपी को 0.3 फीसदी (1,08,592), सीपीएम को 0.2 फीसदी (83,071), स्वराज इंडिया को 0.2 फीसदी (79,400), ऑल इंडिया महिला एमपावरमेंट पार्टी को 0.3 फीसदी (98,152) वोट मिले हैं.

देखिये कैसे, क्या काम कर रहा है नोटा -
सरकार को एंटी इन्कम्वेंसी (Anti Incumbenc)से बचाने भर का काम कर रहा है नोटा 





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