गिरवी बच्चे को छुड़ा न पाने के गम में किसान ने की आत्महत्या, कैसे समाज में जी रहे हैं हम?



''घटना न केवल सरकार के लिए हम सबके लिए भी बेहद दु:खद और शर्मनाक है कि कैसे समाज में जी रहे हैं हम? और ऐसे में जिम्मेदारों के गैर जिम्मेदाराना बयान जैसे कि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और सांसद नंदकुमार चौहान का बयान कि 'बच्चों को गिरवी रखना वहां की परंपरा है', अत्यंत पीडादायक है और बताता है कि कहाँ जा रहे हैं हम...''

बुरहानपुर जिले के भोलाना गांव के किसान कारकुन द्वारा गिरवी रखे बच्चे को न छुड़ा पाने के गम में आत्महत्या करने की घटना किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर कलंक है. यह बताते हुए नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने किसान परिवार को तत्काल दस लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की है, ताकि परिवार अपना कर्ज चुका कर अपने  गिरवी रखे  बेटे को घर वापस ला सके.  



उन्होंने भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और सांसद नंदकुमार चौहान के बयान कि 'बच्चों को गिरवी रखना वहां की परंपरा है', को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में नंदकुमार सिंह चौहान का यह बयान पूरी भाजपा सरकार की मानसिकता बताता है.

नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि यह कितना दु:खद और शर्मनाक है कि ग्राम भोलाना के किसान को ढाई लाख कर्ज के एवज में अपने बच्चे को उसके मामा के यहां गिरवी रखना पड़ा. और फिर फसल खराब हो गई तो वह कर्ज चुकाने में असमर्थ था. यह बात उसे इतनी चुभी कि उसने मौत को गले लगा लिया. श्री सिंह ने कहा कि पुलिस ने खुद स्वीकारा की दस हजार की पगार पर उसका बच्चा मामा के यहां काम कर रहा है. स्पष्ट है कि किसान परिजनों को गिरवी रखने की बात सही है. नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर कौन लोग हैं, जिन्हें जीरो प्रतिशत ब्याज पर कर्ज मिल रहा है. और दुनिया की सर्वाधिक कृषि विकास दर का लाभ किसानों को क्यों नहीं मिल रहा है. 


नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा अपने तीसरे कार्यकाल में ही किसान पुत्र मुख्यमंत्री के राज में साढ़े पांच हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है. देश के उन राज्यों में मध्यप्रदेश अग्रणी है, जहां किसानों ने सर्वाधिक आत्महत्या की है. पिछले पांच साल में किसानों के आत्महत्या में प्रदेश में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह जानकारी लोकसभा में खुद भाजपा सरकार के गृह राज्यमंत्री ने दी है.

नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ और सिर्फ प्रचार, प्रपंच और पाखंड से यह खुशफहमी पैदा कर रहे हैं कि किसानों के लिए सरकार ने बहुत कुछ किया, लेकिन असलियत क्या है, यह कारकुन किसान की आत्महत्या ने खोलकर रख दी है.



Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc