घोड़ा मर गया या गायब करा दिया, पशु चिकित्सकों की गंभीर लापरवाही या फिर मिलीभगत, भड़के घोड़ा मालिक, जताएंगे विरोध



''... और अब बताया जा रहा है कि वह घोड़ा मर गया. अभी साफ़ यह भी नहीं कहा जा सकता कि घोड़ा मर गया या बाहर भेज कर गायब कर दिया गया. मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों की गंभीर लापरवाही या फिर उनकी घोड़ा मालिक रहमान बख्श से मिलीभगत सामने आयेगी.'' 




भोपाल में बारात में घोड़ों पर प्रतिबन्ध के बाद घोड़े मालिक भड़क गए हैं. घोड़ा मालिकों का यह कहना बाजिव लगता है कि साल में 4 माह सीजन रहता है, शेष 8 माह बैठ कर घोड़े को खिलाते हैं. यदि यह प्रतिबन्ध लग गया तो हमारे परिवार पर खाने तक का संकट आ जाएगा. अब वे आज सोमवार को महापौर से मिलकर विरोध जताएंगे. 



इधर पता चल रहा है कि काजीकैम्प क्षेत्र के बाफना कॉलोनी निवासी निवासी रहमान बख्श के जिस घोड़े की जांच में ग्लैंडर्स नामक बीमारी पाई गई थी, वह मर गया है. यह जानकारी घोड़ा मालिक रहमान बख्श ने दी है. पर घोड़े की मौत की पुष्टि नहीं हो सकी है. साथ ही मामले में पशु चिकित्सा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है कि जब उस घोड़े में इतनी खतरनाक बीमारी पाई गई थी, तो आखिर से अपने नियंत्रण में क्यों नहीं लिया गया? उस पर नजर क्यों नहीं रखी गई? 

रहमान बख्श के घोड़े की जांच पशु चिकित्सालय जहांगीराबाद में हुई थी. उसमें गंभीर बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षण पाए जाने पर भी पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों ने गंभीरता नहीं बरती, घोड़े के खून के सैम्पल हिसार, हरियाणा लेब को भेज कर अपनी इति श्री कर ली. सवाल यह भी है कि घोड़ा मालिक रहमान बख्श को गड़बड़ लगी, या उसे सैम्पल रिपोर्ट आने के पहले ही बीमारी के बारे में साफ़ बता दिया गया, जिससे उसने घोड़े को बाहर भेज दिया. और अब बताया जा रहा है कि वह घोड़ा मर गया. अभी साफ़ यह भी नहीं कहा जा सकता कि घोड़ा मर गया या बाहर भेजने के नाम पर गायब कर दिया गया. 

मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों की गंभीर लापरवाही या फिर उनकी घोड़ा मालिक रहमान बख्श से मिलीभगत सामने आयेगी. फिलहाल इतना तय है कि भोपाल के घोड़ा मालिक अवश्य परेशान हो गए हैं. 

यह भी देखें 
 मामले में निगम कमिश्नर प्रियंका दास के आदेश   










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