महिलाएं घर में ही सुरक्षित नहीं, उचित मदद मिले


महिलाओं से घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इनकी रोकथाम के लिए 

सशक्त कदम नहीं उठाये जा रहे. जब महिलायें घर में ही सुरक्षित नहीं 

तो बाहर कैसे सुरक्षित रहेंगी?




@भारती मंडलोई 



रेलु हिंसा, जिसे हम मामूली अपराध समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, पर इस तकलीफ़ से जो पीड़ित महिलाएं गुजरती हैं, वो शायद ही शब्दों में बया कर पायें. हमारे पास कई ऐसे घरेलू हिंसा के केस आ रहे हैं, जिनमें पति द्वारा या घर के सदस्यों द्वारा महिला प्रताड़ना का शिकार हो रही है. इसमें ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित करने के केस तो हैं ही. लेकिन ऐसे भी कई केस सामने आ रहे हैं, जिनमें पिता द्वारा या भाईयों द्वारा भी प्रताड़ना दी जाती है. ये लोग हमारे पास इसलिये आते हैं, क्योंकि पीड़ित को डर रहता है या उसे अपनी आवाज़ उठाने का प्रोसिजर पता नहीं होता. 

कई केस तो हम लोग खुद ही सुलझाने की कोशिश करते हैं और जो नहीं कर पाते तो पुलिस स्टेशन में भेजते हैं या खुद ले के जाते हैं, लेकिन वहां ये जरूर देखने में आता है कि इन मुद्दों को लेकर पुलिस सख्त नहीं होती है. महिलाएं अगर घर में ही सुरक्षित नहीं और अगर उन्हें पुलिस से भी उचित मदद नहीं मिलेगी तो वो बाहर कैसे मजबूत बनेगी या अपने बच्चो को कैसे मजबूत बनायेंगी क्योंकि वो अपनी आवाज़ को कभी उठा ही नहीं पायेंगी या कोशिश भी करेंगी, तो दबा दिए जाने पर अपने आपको कमज़ोर महसूस करेंगी. 





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