कर्नाटक में नोटा नहीं होता तो पिक्चर कुछ और होती...



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स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि चुनाव प्रणाली स्वच्छ व पारदर्शी हो. यह बेहद दु:ख की बात है कि आज आजादी के 71 बाद तक देश का आम आदमी चुनाव में किसे चुने, के लिए उसके पास कोई ठीक से विकल्प नहीं है. 

जिस उद्देश्य को लेकर नोटा की बात की जा रही थी, उसमें वह पूरी तरह फेल रहा है. आज नोटा केवल और केवल सरकारों को को एंटी इन्कम्वेंसी से बचाने भर का रोल निभा रहा है. 

आज कर्नाटक में नोटा नहीं होता तो पिक्चर कुछ और होती...


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देखिये हमने जो लिखा था वह कर्नाटक में हो गया-




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