अंकित चड्ढा जैसा संजीदा और समझदार इंसान, झील में डूबने जैसे हादसे का शिकार कैसे हो गया?



''अंकित चड्ढा का झील किनारे वॉक करने जाना तो समझ आता है, लेकिन बैलेंस बिगड़ना और चंद सेकंडों में डूब जाना, बिलकुल गले नहीं उतरता. गर्मी के मौसम में झील के किनारे एकदम से इतनी गहराई नहीं हो सकती कि एक व्यस्क व्यक्ति डूब ही जाए.'' 



इंदौर से
@ आलोक बाजपेयी

अंकित चड्ढा जैसा संजीदा और समझदार इंसान झील में डूबने जैसे हादसे का शिकार हो सकता है, मेरी समझ में तो बिलकुल नहीं आ रहा है. हम जानते हैं जिसे तैरना नहीं आता, वह पानी से थोड़ी एक्स्ट्रा दूरी बनाकर रखता है. दूसरे, किसी दूसरे शहर में परफॉर्म करने गया आर्टिस्ट शो के पहले ही सौ तरह की सतर्कताएँ बरतता है और आने वाले शो की रिवर्स क्लॉक उसके दिमाग में कमोबेश चलती रहती है. ऐसे में व्यक्ति ठंडा-गरम खाने, ज़्यादा खाने, नींद पूरी न हो पाने आदि की भी रिस्क नहीं लेता, सफल शो के बाद वह भले चाहे जो आनंद कर ले, पर शो तक तो सब कुछ नियंत्रित रहता है. 

ऐसे में अंकित भाई का झील किनारे वॉक करने जाना तो समझ आता है, लेकिन बैलेंस बिगड़ना और चंद सेकंडों में डूब जाना, बिलकुल गले नहीं उतरता. गर्मी के मौसम में झील के किनारे एकदम से इतनी गहराई नहीं हो सकती कि एक व्यस्क व्यक्ति डूब ही जाए. झील की गहराई किनारे पर कितनी है, इसकी जाँच के साथ ही उनकी मित्र अपर्णा से भी कड़ी पूछताछ होनी चाहिए और इसकी भी कि अपर्णा को स्वीमिंग आती है या नहीं? 

वो दास्तानगोई के क्षेत्र का सुपरस्टार था और सृजन जगत का युवा करिश्मा भी, जिससे पूरी दास्तानगोई को नए आयाम देने की आश्वस्ति थी. उसकी संदिग्ध मृत्यु की ठीक वैसी ही सूक्ष्म जाँच होनी चाहिए, जैसी किसी राजनेता या फ़िल्म सितारे के मामले में होती. श्रद्धांजलि दोस्त ... जिस दुनिया को आप बेहतर बनाने में जुटे थे, वह आपको हमेशा मिस करेगी. 
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