महिलाओं के मूल अधिकारों के प्रति देश, समाज उतना गंभीर नहीं, जितना कि होना चाहिए




''यह तकलीफदेह है कि महिलाओं के मूल अधिकारों के प्रति जितना गंभीर देश, समाज को होना चाहिए, वह नहीं देखा जा रहा. आज वोट की खातिर कितनी ही चीजें मुफ्त बाँट दी जाती हैं, लेकिन एक सैनेटरी नैपकिन भर नहीं.'' 



@सीमा राय 'मधुरिमा'

वाल है कि जिस देश में वोट की खातिर कितनी ही चीजें मुफ्त बाँट दी जाती हैं. क्या उस देश में हम गरीब लड़कियों के लिए सैनेटरी नैपकिन मुफ्त में मुहैया नहीं करवा सकते? एक नैसर्गिक प्रक्रिया है मासिक धर्म और हम सभी इसे जानते और समझते हैं, पर बात करने से कतराते हैं, आखिर क्यों?

खासकर ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र की झुग्गी बस्तियों में रह रही गरीब महिलाओं को महंगे होने के कारन भी सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं हो पाते. ऐसी स्थिति में क्यों न हम एक ऐसा कोष सृजित करें, जिसमें सभी अपनी मर्जी से कुछ दान दें, जिससे हर गरीब लड़की को यह सुविधा मिल सके, क्योंकि जिन लड़कियों को ठीक से तन ढकने के कपड़े नहीं मिल पाते, उन्हें इन दिनों में इस्तेमाल करने के लिये साफ़ सुथरा कपड़ा कहाँ से मिल सकता है और इस सबका परिणाम दुनिया भर की बीमारियों से ग्रसित हो समाज में बीमारियाँ फैलाना होता है. 

खास कर गाँवों में जहाँ सैनिटरी नैपकिन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते, एक बड़ी समस्या है. ऐसे में वह कुछ भी गंदे कपड़े यूज कर बीमारियों से घिर जाती हैं. और हम बात करते हैं देश समाज के स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता की. समाज तभी स्वस्थ होगा जब हमारी कोशिश हर एक गरीब को साफ़ सफाई का भरपूर ज्ञान और उसके लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करा सकें. हर वह जरूरत की चीज, जो गंदगी फैलने से रोक सके हमें उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे बीमारियाँ बढ़ने से रोकी जा सकें.

हालांकि कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने पहल की है. उसका लाभ भी मिल रहा है, लेकिन जिस स्तर पर आवश्यकता है वह नहीं. यह तकलीफदेह है कि महिलाओं के मूल अधिकारों के प्रति जितना गंभीर देश, समाज को होना चाहिए, वह नहीं देखा जा रहा.
हाल में अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' रिलीज़ हुई है. सैनिटरी नैपकिन पर आधारित इस फिल्म में बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए महीने के उन चार से सात दिनों के दौरान सैनिटरी नैपकिन कितना ज़रूरी है. इस फिल्म की स्टोरी अरुणाचलम मुरुगनथम की जीवन की कहानी से प्रेरित है, जिन्होंने कम लागत वाले सैनिटरी पैड बनाने की मशीन का आविष्कार किया था. मुरुगनानथम ने एक ऐसी मशीन बनाई जो सैनिटरी नैपकिन्स सस्ते दाम में उत्पादित करती थी. उनको इस आविष्कार के लिए पद्म श्री से भी नवाजा गया था. 

'पैडमैन' फिल्म बनाकर फिल्म निर्माता ने सराहनीय कार्य किया है. असल जिन्दगी में हमें ऐसे कई मुरुगनथम की जरूरत है, तभी कुछ देश का कल्याण हो सकेगा.

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