अधिकारी/कर्मचारियों के प्रति नजरिया बदलिए, नज़ारे बदल जायेंगे


''आज भी ऐसे बहुत अधिकारी/कर्मचारी आपको मिल जायेंगे, जो जिम्मेदारी से 

आगे बढ़ कर जन हित के कार्यों में अव्वल रहते हैं.''




@ विदिशा से विमलेश सक्सेना 



ह सही है कि कुछ अधिकारी/कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति उतने जिम्मेदार नहीं होते, जितना कि होना चाहिए, लेकिन फिर भी सभी को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता. आज भी बहुत ऐसे अधिकारी/कर्मचारी आपको मिल जायेंगे, जो बहुत जिम्मेदारी से आगे बढ़ कर जन हित के कार्यों में अव्वल रहते हैं. 


सो बस मेरा इतना ही कहना है कि  जो लोग बन्द कमरों में बैठकर सरकारी कर्मचारियों को कोसते रहते हैं, मैंने ने उन्ही कर्मचारियो को रात को 1 बजे अपना काम निपटाते हुए देखा है, चाहे वह विधुत विभाग के हों, चाहे नगरपालिका के या राजस्व/पुलिस के. मेरा कहना है कि नजरिया बदलिए, नज़ारे बदल जायेंगे. 




हाल में ताजा उदाहरण लें तो भोपाल में रातीबध में जब मिटटी मिला गेंहूं मिला तो वेयर हाउस कारपोरेशन के जिला प्रबंधक अली अख्तर ने बड़ी ही बहादुरी से कर्तव्य को प्राथमिकता से निभाया. जबकि उन्हें वेयर हाउस में मिट्टी मिलाने वालों ने जम कर धमकाया. लालच भी दिया. विदिशा में भी उदय हजारी रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं.  अधिकारी/कर्मचारी स्वच्छता अभियान में योगदान दे रहे हैं. रेलवे स्टेशनों पर पानी पिला रहे हैं. गाँवों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगा रहे हैं. रूढ़ियों और अंधविश्वास के खिलाफ जागृत कर रहे हैं. पर्यावरण के लिए पेड़ लगा रहे हैं या नदियों के गहरीकरण में श्रमदान कर रहे हैं.
रक्त दान करते हुए विदिशा के श्री उदय सिंह हजारी     
आज ऐसे एक अली अख्तर या उदय हजारी ही नहीं, कई अधिकारी/कर्मचारी हमारे सामने हैं. आवश्यकता है उन्हें प्रोत्साहित करने की, उनको उचित संरक्षण की. वरन कुछ गड़बड़ लोग तो हर क्षेत्र में हैं. 



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