बागड़ ही खा रही खेत, कबाड़ी की दुकान पर मिलीं शिक्षा विभाग की पुस्तकें, पुस्तकों पर लात रख कर शिक्षा अधिकारी कर रहे जांच



''शिक्षा विभाग का बड़ा अधिकारी उन्हीं पुस्तकों पर अपने पैर रख कर शिक्षा विभाग की गरिमा तार तार कर रहा था. जिसकी पुस्तकों के पीछे यह गंदी मानसिकता है, क्या जांच होगी, आसानी से समझा जा सकता है.''




@सिवनी से विनोद सोनी   



शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की बातें करने वाली सरकार हजारों स्कूल बंद करने जा रही है. जब सरकार ही शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है तो ऐसे में शिक्षा की बैण्ड बजाने में सरकार के नुमाईंदे भी क्यों पीछे रहें? सो प्रशासनिक गरिमा उठने के बजाय लगातार नीचे गिर रही है. वो किताबें जो गरीब बच्चों में बंटना थीं, कबाड़ी की दुकान पर पहुँच गईं. इतना ही नहीं, उनकी जांच करने वाला शिक्षा विभाग का बड़ा अधिकारी उन्हीं पुस्तकों पर अपने पैर रख कर शिक्षा विभाग की गरिमा तार तार कर रहा था. क्या जांच होगी समझा जा सकता है. देखें वीडियो-


बात सिवनी की है. जहाँ एक कबाड़ी की दुकान में बंडोल शासकीय स्कूल की पाठ्य पुस्तक निगम की कक्षा नौवी से बारहवी की पुस्तकें मिली हैं. जो 14 बोरियों में थी और उनका बजन 400 किलो है. साहू कबाड़ी दुकानदार के मुताबिक पुस्तकें बंडोल के शासकीय स्कूल की हैं, जिन्हें नेमा कबाड़ी ने लाकर उसे बेचा है. जिला शिक्षा अधिकारी एस.पी.लाल को खवर मिली कि गुरुनानक वार्ड में साहू कबाड़ी के यहां शासकीय पुस्तकों की बोरिया रखी हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग की टीम वहां पहुंची. कबाड़ी दुकानदार के मुताबिक पुस्तकें बंडोल के स्कूल की हैं, जिन्हें नेमा कबाड़ी ने लाकर उसे बेचा है. फिलहाल शिक्षा विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं. और दोषियों पर कार्यवाही की बात भी कर रहे हैं. 

कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई, लेकिन मामला दर्ज नहीं कराया गया है. शिक्षा विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि दोषियों पर कार्यवाही होगी, लेकिन शहर में आम चर्चा है कि जैसा होता आया है, कुछ दिन में सब रफा दफा हो जाएगा. लोगों का कहना है कि जाँच भी वही विभागीय अधिकारी कर रहे हैं, जो ऐसे लोगों को आश्रय देते रहे हैं. ऐसे जांच अधिकारी जो उन्हीं पुस्तकों पर अपने पैर रख कर शिक्षा विभाग की गरिमा तार तार कर रहे थे. ऐसे में क्या जांच होगी, आसानी से समझा जा सकता है. इतने बड़े मामले को क्या कलेक्टर अपने हाँथ में लेंगे? और क्या मामला दर्ज किया जायेगा? 

विकास के तमाम वादे और उनकी जमीनी हकीकत क्या है, इस मामले से समझ में आता है. सवाल इस बात का है कि जिन पुस्तकों को अध्ययन के लिए स्कूलों में भेजा जाता है और पुस्तकों में विद्या की देवी सरस्वती का वास माना जाता है, उन्हीं पुस्तकों पर पैर रखकर जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी. सवाल यह भी है कि क्या शिक्षा विभाग के इन अधिकारियों पर भी कोई कार्यवाही होगी, जो पुस्तकों पर पैर रखकर शिक्षा विभाग की छबि धूमिल कर रहे हैं और विद्या का अपमान कर रहे हैं. 




देखें वीडियो, कैसे शिक्षा विभाग का जांच अधिकारी पवित्र पुस्तकों पर पैर रखे हुए है-






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