कर्नाटक से हो गया 2019 का आगाज, आसान नहीं सत्ता की डगर



”राहुल गांधी जिस प्रकार से आक्रामक रूप में सामने आये हैं और जैसा कि उन्होंने न केवल सीधे प्रधानमन्त्री मोदी और अमित शाह पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा कर जोरदार हमला किया, बल्कि बीजेपी द्वारा जनादेश का अपमान बताया, घमंड और ताकत नहीं,जनता बड़ी होती है, यह लोकतंत्र की जीत हुई है, बताकर सिद्ध कर दिया है कि अब उन्हें अपरिपक्व तो नहीं कहा जा सकता.”



@राकेश तिवारी 

हुमत नहीं होने के बाबजूद बीजेपी एन केन केन प्रकारेण कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए इतनी बैचेन क्यों थी? क्या बजह थी कि बहुमत नहीं होने के बाबजूद राज्यपाल के पद का जबरदस्त दुरूपयोग कर लोकतंत्र पर प्रहार किया गया? और साफ़ साफ़ यह जानने के, कि हम बहुमत सिद्ध नहीं कर पायेंगे, आखिरी समय तक आत्मविश्वास से लबरेज बहुमत का दावा किया जाता रहा, अंतरात्मा की आबाज भी खरीदने की नाकाम कोशिश की गई. 

इन सवालों पर राजनैतिक विश्लेषक बताते हैं कि बजह साफ है 2019. कांग्रेस भी चुनाव पूर्व जहाँ जेडीएस के खिलाफ मैदान में रही, लेकिन जैसे ही देखा कि मामला बिगड़ रहा है, 2019 को देखते ही तुरंत एक परिपक्व निर्णय लिया और अपने को जेडीएस को सौंप दिया. अब कर्नाटक में 37 सीट वाली पार्टी जेडीएस राज करेगी. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ. पूर्व में भी ऐसा होता आया है. लेकिन सवाल है कि इसका यह मतलब कतई नहीं कि हम उसमें बदलाव न करें. जैसा होता रहा है, यदि वैसा ही आगे भी होगा. तो सरकार बदलने का क्या मतलब रह जाता है? 

कर्नाटक के ताजा घटनाक्रम ने देश को बता दिया कि राजनीति जनसेवा नहीं होती. जेब भरने की सेवा होती है. सो एक राज्यपाल ही नहीं राजनैतिक दलों की भी घटिया वाली साख और कई मीटर नीचे गिरी है. खैर कर्नाटक में अब यदि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार सही तरीके से चल गई तो 2019 के लोकसभा चुनाव में, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठजोड़ की ही तरह कर्नाटक में भी भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा हो जायेंगी. कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की ताकत बेहद बढ़ जायेगी, क्योंकि विधान सभा चुनावों में बीजेपी को मिले 37% मतों के मुकाबले कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के कुल 57 फीसदी वोट खासे भारी हैं.
 
इसी के साथ कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन की संभावनायें खासी बढ़ गई हैं. साथ ही केंद्रीय राजनीति में पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा की भूमिका भी बढ़ जाएगी. साथ ही इसी साल होने जा रहे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस का मनोबल भी बढ़ेगा. इसका फायदा उसे चुनावों में मिलना तय है. यह तीनों ही राज्य 2019 के हिसाब से देखें तो काफी महत्वपूर्ण हैं. 

कर्नाटक घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी जिस प्रकार से आक्रामक रूप में सामने आये हैं और जैसा कि उन्होंने न केवल सीधे प्रधानमन्त्री मोदी और अमित शाह पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा कर जोरदार हमला किया, बल्कि बीजेपी द्वारा जनादेश का अपमान बताया, घमंड और ताकत नहीं,जनता बड़ी होती है, यह लोकतंत्र की जीत हुई है, बताकर सिद्ध कर दिया है कि अब उन्हें अपरिपक्व तो नहीं कहा जा सकता. 

by : aankhondekhahaalnews1st.com




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