'योग भगाए रोग' व्यापार की भाषा है, फिर भी यह सच है कि योग बीमारियों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है

Image result for योग भगाए रोग

''योग भगाए रोग'' व्यापार की भाषा है, पर जिन लोगों ने योग की दुकानें खोल रखी हैं, वे लोगों को यही समझाते हैं कि योग, रोग भगाने के लिए है। दरअसल उन्हें ग्राहकों की मांग के हिसाब से बातें करनी होती है। पर विशुद्ध योग की बात करने वाली संस्थाएं ऐसा दावा कभी नहीं करतीं। सवाल है कि योग है क्या?'' 
                                                                              @ किशोर कुमार 

दिल्ली में हुए योगोत्सव में विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय के स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने इसकी व्याख्या की – ''योग आत्म-ज्ञान प्रदान कराने वाली महान विद्या है। इसका मुख्य लक्ष्य बीमारियों से निजात दिलाना नहीं है। पर यह भी सच है कि योग के सकारात्मक प्रभाव बीमारियों को दूर भगाते हैं।

पर कई लोगों के मन में दुविधा रह गई। तब स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने एक उदाहरण के जरिए बात को ज्यादा स्पष्ट किया - 'योग निद्रा योग पूर्ण मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक विश्रांति प्रदान करने की व्यवस्थित पद्धति है। बिहार योग विद्यालय के संस्थापक महासमाधिलीन परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने अस्सी साल पहले तंत्र शास्त्र में वर्णित न्यास पद्धति के गूढ ज्ञान का शोध करके चमत्कारिक योग निद्रा का प्रतिपादन किया था। पर यह भी सही है कि यह योग अनेक घातक बीमारियों के इलाज में सक्षम है।

उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी पेश किए। कहा अनुसंधानों से पता चल चुका है कि यह योग जानलेवा कैंसर के प्रभावों को भी कम करने में मददगार है। इस विषय पर आस्ट्रेलिया के चिकित्सक डा. एइनसाई मीरेस के शोध को सबसे प्रामाणिक माना जाता है। अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ हुए एक अध्ययन में देखा गया कि योग निद्रा के नियमित अभ्यास से रक्तचाप स्थायी रूप से नियंत्रण में आ जाता है। स्वीडेन में अनुसंधान हुआ तो पता चला कि कोलाइटिस व पेप्टिक अल्सर में यह योग लाभप्रद है। मानसिक रोगियों के लिए तो रामबाण है।

स्वामी शिवराजानंद सरस्वती मानते हैं कि योग का आधार सांख्य दर्शन है। यह हिंदू धर्म का कोई अंग नहीं है। इसे दर्शन और विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। यह चिंताजनक है कि आत्म-ज्ञान प्रदान कराने वाली इस महान विद्या को कमर दर्द, वजन घटाने आदि में सीमित कर दिया गया है। यह भारत की प्रचीन योग विद्या के लिए चेतावनी है। इसलिए वक्त आ गया है कि व्यापार में उलझे योग विद्या केंद्रों को हत्तोत्साहित किया जाना चाहिए। वरना योग के मूल उद्देश्य से भटकाव को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc