समाजसेवी श्री उदयपाल सिंह ने शालू को लिया गोद तो लोगों ने कहा 'सामाजिक दायित्वों का निर्वहन सब कोई ऐसे करने लगे तो फिर कोई समस्या ही न रहे'





आज विदिशा के लिए दिन बहुत ही महत्वपूर्ण रहा. शहर की अनाथ हो गई बच्ची शालू राजपूत को हजार बाधाओं के बाबजूद आखिर घर मिल ही गया. शहर के व्यवसायी और समाजसेवी श्री उदयपाल सिंह जी चंदेल ने शालू राजपूत बेटी की सम्पूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा, स्वास्थ्य और विवाह सहित एक पिता के रूप में निभाने का संकल्प लिया. एक बेटी को माता पिता और भाई मिले तो एक परिवार को बेटी मिली. 

बहुत पहले ही मां पिता को खो चुकी शालू अपने दादा के साथ किराये के मकान में रह रही थी. पिछले दिनों जब दादा जी भी साथ छोड़ गए तो वह अनाथ हो गई, तब अपने बुआ और फूफा के साथ रहने लगी, लेकिन उनकी भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब करणी सेना, चाइल्ड लाइन विदिशा के प्रभारी श्री अनिल धाकड़ जी, सफल शिक्षा सेवा समिति, समाजसेवी विकास पचौरी सहित शहर के कई लोग आगे आये. और सबसे महत्वपूर्ण कि शहर के व्यवसायी और समाजसेवी श्री उदयपाल सिंह जी चंदेल ने शालू को बेटी की तरह जिम्मेदारी लेने की बात की. 

इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ. शालू अभी नावालिग़ है सो कानूनन अड़चन आ रही थी, लेकिन वह भी शार्ट आउट हो गई जब शालू के बुआ फूफा जी ने सहमति दे दी. बस फिर क्या था आज बेटी शालू की घर से बिदाई धूम धड़ाके के साथ हुई. सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे. करणी सेना के सभी सदस्य, शहर के गणमान्य नागरिक, नेता और समाजसेवी इस खुशी में शामिल हुए.

सफल शिक्षा सेवा समिति विदिशा के मनोज कौशल का कहना रहा कि सामाजिक दायित्वों का निर्वहन हम सभी को अपनी अपनी क्षमता के अनुसार अवश्य करना चाहिये. 










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News Digital India 18

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