अब वो जमाना-सा लगे..

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धुधला-सा लगे,
कभी धारी-सा लगे,,
था...साफ़.....
वो एक ऑइना,
अब तेज आरी सा लगे ।।

बेखबर थे,
खुद ही खुद से,,
मिले दरो-ए-दीवार तो,
अब वो झरोखा सा लगे ।।

रोशन हुए,
सूरज की धूँप से,,
आये कभी ना अँधेरा,
अब वो उजाला-सा लगे ।।

बिछड़े हम तो,
रूठ कर कहेंगे,,
आया ना मनाना उन्हें,
अब वो सजदा-सा लगे ।।

मिलते नहीं,
छूट गए टूट गए,,
जुड़ कर नहीं मिलते,
अब वो जमाना-सा लगे ।।

@ उमा मेहता त्रिवेदी  

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