जज्बा यह होता है कि रात को नींद न आये.. स्लम एरिया के बच्चों में शिक्षा का अलख जगाने में लगे हैं मनोज कौशल




उस शहर में आज भी सिसक रहा है बचपन


''काम का जज्बा यह होता है, मानसिकता यह होती है कि रात को नींद न आये, फिर कोई काम कैसे नहीं होगा. विदिशा में  सफल शिक्षा सेवा समिति के माध्यम से श्री मनोज कौशल स्लम एरिया के बच्चों में शिक्षा का अलख जगाने, कहते हैं पागलों की तरह जुटे हुए हैं. '' 

जिस शहर से ग़रीब बेसहारा मजदूर बच्चों पर काम कर कैलाश सत्यार्थी नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित किये गए, उस शहर विदिशा में आज भी बचपन सिसक रहा है. ऐसे बच्चों के लिए और क्या किया जाए, जिससे उनके जीवन में भी उजाला आये, रंग आयें. वे सफल हों और इस दलदल से निकलें. यह भी अब विदिशा के ही युवा श्री मनोज कौशल सोच रहे हैं.

श्री मनोज कौशल बताते हैं कि स्लम एरिया के बच्चों के बारे में सोचकर देर रात तक नींद नहीं आती. ऐसे बच्चों की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो रहा, कारण सबको पता है. योजनाएं बनती हैं, लेकिन 70 सालों में हुआ कुछ नहीं. न स्लम एरिया के बच्चों का कुछ हुआ, न सेक्स वर्कर्स के बच्चों का. हालात बच्चों के दोनों जगह एक जैसे ही हैं. कारण आर्थिक ही है, और कुछ उनकी मान्यताएं. सरकार द्वारा इसका हल ऐसे लोगों को सौंपा जाता है, जो बस अपनी सरकारी ड्यूटी निभाते हैं, जिनकी मानसिकता होती है कि इनका कुछ नहीं हो सकता. सही है ऐसे लोगों से कुछ हो भी नहीं सकता.

श्री मनोज कौशल बताते हैं कि जब तक ऐसे परिवारों के बच्चों की जिम्मेदारी सरकार स्वयं नहीं लेगी, ये कुचक्र खत्म नहीं होगा. ऐसे बच्चों को आवासीय स्कूलों में प्राथमिक स्तर से ही रखा जाए. उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को वहीं पूरा किया जाए. बच्चे माँ बाप के साथ उनकी समस्याओं में ही उलझ जाते हैं. सरकारें बजट बढ़ाएं, अगर सरकारें शिक्षा का बजट नहीं बढ़ायेंगी तो उन्हें अपराध रोकने के लिए बजट बढ़ाना होगा. अगर इन बच्चों को शिक्षा नहीं मिलेगी तो ये अपराध की तरफ ही जायेंगे. अपराध का विश्लेषण करके देख लीजिए इन्ही में से अपराधी बनते हैं. आप इनको न भीख मांगने से रोक सकते हैं, न इनके माँ बाप को सजा से इन्हें रोक सकते हैं. 

श्री कौशल बताते हैं कि और जब आपने जिम्मेदारी ही नहीं ली तो आपको सजा देने का अधिकार भी नहीं. एक बात और धनी और सक्षम ब्यक्ति ये न सोचें कि वो धन और ताकत से सुरक्षित हो सकते हैं, ये गलतफहमी निकाल दीजिये. अगर आप अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करेंगे तो इनके अपराध का शिकार भी आप ही होंगे, बच नहीं सकते, न अभी तक बचे हैं. श्री कौशल बताते हैं कि समाज को इनकी जिम्मेदारी लेनी ही होगी.

श्री कौशल बताते हैं कि विदिशा में सफल शिक्षा सेवा समिति अभी लगभग 150 बच्चों की शिक्षा, उनका स्वास्थ्य, उनकी दैनिक आवश्यकताओ की पूर्ति और उचित मार्गदर्शन का काम कर रही है. समस्या राष्ट्रीय स्तर की है, अकेले ये सम्भव नहीं. सभी साथ आयें और अपनी जिम्मेदारी निभायें. सरकार भी गंभीर हो तो सफल शिक्षा होगी, तभी सफल जीवन और सफल देश होगा.

@ मुकुट सक्सेना   





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