लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ साधु-संतों के पास जाते हैं, उनसे वहां बाजारू बात न हो -स्वामी शिवराजानंद सरस्वती

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धनबाद से किशोर कुमार 

बड़ा सवाल है कि नाना प्रकार की समस्याओं से त्रस्त लोग जब हर स्तर पर थक-हार जाते हैं तो यह सोचकर श्रद्धा और विश्वास के साथ साधु-संतों के पास जाते हैं कि उन्हें वहां उनसे संकट से निकलने का मार्ग मिलेगा। पर वहां भी धन के लोभ में मजबूरी का फायदा उठाने वाले ही मिलेंगे, तो त्रस्त आदमी कहां जाएगा? वह किस पर भरोसा करेगा?''

विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय का स्वयं को जानो योगोत्सव 2018 के अंतिम दिन दिल्ली वालों को योग की प्राचीन परंपरा वाले आश्रम के योगोत्सव के बारे में जैसे-जैसे भनक लगी, भीड़ बढ़ती गई। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में लगभग 25 हजार वर्गफुट में बना पंडाल छोटा पड़ गया। योगोत्सव 2018 देश के प्रबुद्ध वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों, योग चिकित्सकों, योग शोधकर्त्ताओं, संन्यासियों और योगियों के साथ ही समाज के विभिन्न तबकों के लोगों का अनूठा संगम था, जो आमतौर पर दुर्लभ होता है।


'स्वयं को जानो योगोत्सव 2018' के अवसर पर संयोजक स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने कहा- योग आत्म-ज्ञान प्रदान कराने वाली महान विद्या है। इसलिए योग विद्या के केंद्रों को कभी भी व्यापार में नहीं उलझना चाहिए। वरना योग को उसके मूल उद्देश्य से भटकाव को रोकना नामुमकिन हो जाएगा। महासमाधिलीन गुरू और विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती कहा करते थे कि यदि आश्रम व्यवसाय करना शुरू कर देंगे तो वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा का पलायन हो जाएगा। 

उन्होंने कहा वैसे भी, नाना प्रकार की समस्याओं से त्रस्त लोग जब हर स्तर पर थक-हार जाते हैं तो यह सोचकर श्रद्धा और विश्वास के साथ साधु-संतों के पास जाते हैं कि उन्हें संकट से निकलने का मार्ग मिलेगा। पर वहां भी धन के लोभ में मजबूरी का फायदा उठाने वाले ही मिलेंगे तो त्रस्त आदमी कहां जाएगा? वह किस पर भरोसा करेगा?

सुकून देने वाली बात यह है कि देश में योग विद्या की कुछ संस्थाएं हैं, जो गरिमा बनाए हुई हैं। ईश्वर करें कि ऐसी संस्थाओं को व्यापार में उलझी मीडिया की नजर न लगे।

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