कास्टिंग काउच, 'सबको जल्दी है आसमान छूने की', महिलाएं भी मतलब के लिए निम्न स्तर तक जाने को रहती हैं तत्पर

 à¤°à¥‡à¤£à¥à¤•à¤¾ चौधरी कास्टिंग काउच માટે છબી પરિણામ

कल आदरणीय रेणुका चौधरी जी ने ब्यान दिया है कि संसद भी कास्टिंग काउच जैसे कृत्य से बरी नहीं, यानि कि वहाँ भी लोग महिलाओं को किसी भी तरह का लाभ देने के लिए शारीरिक शोषण की शर्त रखते हैं, उधर सरोज खान ने फिल्मी दुनिया के लिए पहले ही यह स्वीकार किया था.

मेरा अपना मानना है, हम किसी भी क्षेत्र विशेष नर और नारी होने से पहले एक इंसान हैं. चूंकि इंसान हैं भगवान नहीं तो व्यक्तित्व से सम्बन्धित कमियां होना स्वाभाविक है, इसलिए क्यों किसी विशेष पर आरोप लगाया जाय.

क्षेत्र कोई भी हो, नर और नारी का एक दूसरे के प्रति खिचाव चुम्बक की तरह काम करता है. जो प्रकृति की देन भी है, पर हम पर समाजिक दायरों के ढेरों बोझ होते हैं, जिनके चलते कोई उनको उजागर नहीं कर पाता, ऐसे में जब भी जिस क्षेत्र में आपस में मिलना जुलना ज्यादा होने लगता है, तो कभी आपस में लगाववश तो कभी शोषण भी कह सकते हैं, लोग एक दूसरे का फायदा उठाते हैं, केवल पुरुष ही क्यों दोषी हो, आज महिलाएं भी अपने मतलब के लिए निम्न स्तर तक जाने को तत्पर रहती हैं, सबको जल्दी है आसमान छूने की, एक रेस चल रही है मंजिल पाने की खुद को साबित करने की सब उसका हिस्सा बनना चाहते हैं, पर जब उसके अंदर की गंदगी का सामना होता है, तब आँखें खुलती हैं और तब तक कई बार बहुत देर हो चुकी होती है.

लखनऊ से सीमा "मधुरिमा"

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