राम रहीम और अब आसाराम पर निर्णय के बाद उम्मीद कि कुछ तो चेतेंगे लोग

राम रहीम और अब आसाराम के निर्णय के बाद માટે છબી પરિણામ

धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर इस देश में पंथ और समूह बनाये जाते हैं, जैसे जैसे अनुयायियों की संख्या बढ़ती है, इनकी निरंकुश सत्ता भी बढ़ने लगती है. अंधविश्वासी माँ-बाप अपनी पाली पोसी लाड़ली बेटियों को इनके हवाले रात रात भर के लिए कर देते हैं, न तो उनके पास विवेक होता है न ही कोई शंका कि क्या सलूक होगा उनकी बच्ची के साथ?

कैसा हृदय और कैसा मूढ़ दिमाग रहता है, जो अंधविश्वास के नाम पर इतने क्रूर निर्णय ले पाते हैं. बुलन्दशहर से एक परिचित से कल भेंट हुई निम्न मध्यम वर्ग से हैं. बता रहे थे उनके पिता राम रहीम के अनुयायी थे और दस वर्ष में उन्होंने ढाई लाख की दान की पर्ची कटाई, जबकि बच्चों को पैसा मांगने पर एक रुपया नहीं देते थे. राम रहीम और अब आसाराम के निर्णय के बाद आशा है लोगों में चेतना का कम से कम इतना संचार हो कि अपने मूर्खतापूर्ण निर्णय अपने बच्चों पर न लादें . 

नई दिल्ली से लीना मल्हौत्रा   



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News Digital India 18

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