दिल ये नाजुक दिल मेरा, आबाज़ दी...



कभी आँसू बन के पिघल गया
कभी सावन में प्यासा रह गया
नाजुक जैसे इस दिल की भी तकदीर निराली होती है।
कभी सर्दी में ये ठिठुर गया
कभी गर्मी में ये मचल गया।
फिर भी इसके अन्दर हर मँजर की तस्वीर रूहानी होती है।
मेरा तेरा ये दिल करता है
कभी हँसता है कभी रोता है।
पल पल करवट लेता है इस पर रब की मेहरबानी होती है।
दर्द है इसकी आँखों में
खुशियाँ है इसके दामन में
सब कुछ है इस नन्हे दिल में इस दिल से दुनियाँ हारी होती है।
दर्द से इसका याराना है
धड़कन संग बढ़ते जाना है
खुशियों से तो इस दिल की बस रिश्तेदारी होती है।
शब्द नही पर एहसास है
आँखे नही पर आँसू है
इस नाजुक दिल के आँगन में चाहत की हरियाली होती है।
छोटे छोटे लम्हे है
उन लम्हों में यादें है
बस उन्ही यादों से इस जीवन मे नित्य नई कहानी होती है।

@ नूतन द्विवेदी इलाहाबादी  


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