गलत तालियाँ बजबाईं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नहीं रखेंगी भाई की लाज, फिर करेंगी आन्दोलन




ज्यादा लोग आ जाने से गड़बड़ हो गई 'भाई की लाज रखना', ऐसा मुख्यमंत्री जी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहे हैं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह सब तो ठीक है, यह बताएं कि कार्यक्रम का भगवाकरण क्यों किया गया? और जब सब कुछ पहले ही तय हो गया था, तो उसमें परिवर्तन कर परमानेंट करने और वेतन 18000 की जगह 10000 क्यों? वादाखिलाफी क्यों? आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम फिर से आन्दोलन करेंगे, यानि कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भाई की लाज नहीं रखेंगी. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल संडे को सीएम हाउस में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की पंचायत बुलाई. वेतनमान बढ़ाए जाने से लेकर कई दूसरी मांगें पूरी करने का ऐलान भी किया, परंतु सरकार की सारी कोशिशें बेकार हो गई हैं. सम्मेलन से बाहर निकलीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खुश नहीं थीं. सुपरवाइजरों ने उनसे जबरन तालियां बजवाईं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शिवराज के उपहार स्वीकार करने से इंकार कर दिया है. 

उन्होंने बताया कि हमने हर महीने 18 हजार न्यूनतम वेतन मांगा था. सरकार इस पर राजी भी हुई थी. इसके बाद महापंचायत बुलाई गई. इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यकर्ता का वेतन 5 हजार व सहायिकाओं का 2500 रुपए बढ़ाया, जो 20 से 30 साल की नौकरी करने वाली कार्यकर्ता, सहायिकाओं के साथ धोखा है. इस घोषणा से हम खुश नहीं है. जब पूछा गया कि घोषणा से खुश नहीं थी तो तालियां क्यों बजाई? इस पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि कुछ परियोजना सुपरवाइजरों ने जबरन तालियां बजवाईं हैं. हम दोबारा आंदोलन करेंगे. 




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