राजनीति का खाना या खाने की राजनीति कब तक?





''कम से कम खाने के मामले में अब वो वाला भेदभाव नहीं रहा. होटलों में इस वर्ग के कर्मचारी खाना बनाते भी हैं और परोसते भी है. कई बड़े होटल-ढाबे भी यह वर्ग संचालित कर रहा है. सो यह फोटो अब कुछ जमते नहीं.'' 

आज अम्बेडकर जयन्ती पर फिर एक बार यह दृश्य दिखे. यहाँ शाहपुरा की दलित बस्ती कही जाने वाली झुग्गी बस्ती मीरानगर में अपने कार्यकर्ता दिलीप सुल्तानिया के यहाँ भोपाल महापौर आलोक शर्मा, भोपाल सांसद आलोक संजर और विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह भोजन करने पहुँचे. भोजन कर समानता का, कोई अब अछूत नहीं है का सन्देश दिया. 

लेकिन हाल ही राजस्थान में एक दलित को घोड़ी पर चढ़ कर बरात निकालने से रोका गया. यूपी के कासगंज (इलाहाबाद) के निजामपुर गाँव में एक दलित दुल्हे की घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालने पर विवाद है. सम्बंधित संजय हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चूका है, पर कोई राहत नहीं मिल रही है. और बेहद आपत्तिजनक और हास्यास्पद है कि वहां के जिलाधिकारी कह रहे हैं कि ‘उस जिले में इससे पहले कभी दलित की घुड़चढ़ी नहीं हुई. और बहुत ही हास्यास्पद सलाह देते हैं कि कि ‘अगर घुड़चढ़ी जरूरी है तो चुपके से कर ली जाए.  

अलग-अलग राज्यों से रोज-बरोज दलित उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं.  मोदी जी के गुजरात में आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं, जहाँ दलित वर्ग के लोग कुए से अपने आप पानी नहीं निकाल पाते हैं. कुए से पहले गैरदलित अपने लिए पानी निकालते हैं और उसके बाद दलित वर्ग के लोगों को खुद पानी निकालकर देते हैं. 

असल में समाज के अंदर आज भी सामंतवादी सोच जिंदा है, जो बदलाव में सबसे बड़ी बाधक है. ऐसी सोच वाले सवर्णों को लगता है कि जैसा पुरखों के जमाने से होता आ रहा है, वैसे आगे भी पुश्त दर पुश्त चलता रहे. अगर दलित भी बराबर में आ खड़े हुए तो उन्हें अतिरिक्त सम्मान मिलना खत्म हो जाएगा.  

लेकिन कम से कम खाने के मामले में अब वो वाला भेदभाव नहीं रहा. हालांकि इसके पीछे बजह है बाहर निकलना और मजबूरी में बाहर खाना. होटलों में इस वर्ग के कर्मचारी खाना बनाते भी हैं और परोसते भी है. कई बड़े होटल ढाबे भी यह वर्ग संचालित कर रहा है. सो यह फोटो अब कुछ जमते नहीं. 

कुछ करना ही है तो वास्तव में इस समाज को वह वास्तविक लाभ दिलाईये, जिनके लिए ये आज इतने साल बाद तक भी वंचित हैं. देखिये, क्यों ये वर्ग आज भी आरक्षण का मोहताज बना हुआ है? क्यों विकास नहीं हो रहा इस वर्ग का? या कि आज भी ऐसे फोटो शूट की राजनीति की जाती रहेगी. राजनीति का खाना या खाने की राजनीति आखिर कब तक करते रहोगे?

@ विधि भारती   



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