जैविक खेती बना रही है कृषि को लाभ का धंधा




''रासायनिक खादों पर अनाप-शनाप राशि व्यय होती है वहीं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जैविक खेती कृषि को लाभ का धंधा बना रही है साथ ही पर्यावरण को संतुलित करने में भी योगदान दे रही है। आस-पास क्षेत्र के कृषकों के साथ कृषक श्री राजन सिंह दांगी ने जैविक खेती से हुए फायदे को अपनी आंखो से देखा है। श्री दांगी का कहना है कि अन्य किसानों को जानकारी देने से मुझे अंदर से सुख की अनुभूति हो रही है।''

विदिशा जिले के बासौदा विकासखण्ड के ग्राम जरौद के कृषक राजेन्द्र सिंह दांगी ने जैविक खेती से कृषि को लाभ का धंधा बनाया है। राजेन्द्र सिंह दांगी ने बताया कि पहले रासायनिक उर्वरक और दवाईयों का प्रयोग कर खेती करता आ रहा था। जिसमें लागत अधिक आ रही थी और मुनाफा कम हो रहा था। आत्मा परियोजना के अधिकारी सूर्यभान सिंह थानेश्वर के सम्पर्क में आने पर उनके द्वारा मुझे जैविक खेती करने की सलाह दी गई। मैंने शुरूआत में एक एकड़ में जैविक खेती का प्रयोग करते हुए गेहूं एचआई 1544 बोया। जिसमें जैविक खादों एवं दवाईयों का प्रयोग किया। जिसमें मुख्य रूप से नीम आइल+गौमूत्र से बीज उपचार, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर गैस खाद तथा वर्मी वास और एफबायएम शामिल है।  

   कृषक राजेन्द्र सिंह दांगी का कहना है कि मुझे गेहूं का उत्पादन पौने 17 क्विंटल प्राप्त हुआ और गेहूं की कीमत बाजार में 2950 रूपए बाजार में प्राप्त हुई। इस हिसाब से मुझे शुद्ध आय 49 हजार 412 रूपए की प्राप्त हुई है जैविक खेती में खाद व दवा का खर्च भी शून्य हो गया। मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ी है। जहां पहले रासायनिक खादो का उपयोग करता था तो आमदनी 35245 रूपए हो रही थी जबकि जैविक खाद ने यही आमदनी 49412 रूपए कर दी है।

   कृषक राजेन्द्र सिंह दांगी का कहना है कि जैविक खेती के मुनाफे को मैंने देखा है वही जैविक खेती के उपयोग में लाए जाने वाले तत्व सुगमता से प्राप्त किए जा सकते है बशर्त हमें जागरूकता का परिचय देना होगा। रासायनिक खादों पर अनाप-शनाप राशि व्यय होती है वही शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जैविक खेती कृषि को लाभ का धंधा बना रही है वही पर्यावरण को संतुलित करने में भी योगदान दे रही है। आस-पास क्षेत्र के कृषकों ने जैविक खेती से हुए फायदे को अपनी आंखो से देखा है और जैविक खेती के संबंध में कृषक श्री राजन सिंह दांगी के मोबाइल नम्बर 9893587673 पर सम्पर्क कर रहे है। श्री दांगी का कहना है कि किसानों को बताकर मुझे अंदर से सुख की अनुभूति हो रही है।




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