सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतें 'स्पेशली क्लोज' होंगी, शिकायतकर्ता की संतुष्टि आवश्यक नहीं

''सीएम हेल्पलाइन जैसी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था अधिकारियों के अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेने के कारण प्रदेश भर में चरमराई हुई है. इसे लेकर सरकार ने नाराजगी जाहिर की है. मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह को नए सिरे से निर्देश जारी करना पड़े हैं.'' 


शहडोल के सोहागपुर में देर रात तक निरीक्षण करते मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह.
मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह समस्याओं की जानकारी के लिए प्रदेश भर में दौरा किये हैं. यहाँ तक कि देर रात तक SDM और तहसील कार्यालयों का निरीक्षण कर समस्याओं को जाना है. इसमें बड़ी संख्या में शिकायतें पेंडिंग पाई गईं. खासकर नागरिकों की शिकायतों का समय सीमा में निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन जैसी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था अधिकारियों के अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेने के कारण प्रदेश भर में चरमराई हुई है. इसे लेकर सरकार ने नाराजगी जाहिर की है. मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह को नए सिरे से निर्देश जारी करना पड़े हैं. 

जारी निर्देशों में बताया गया है कि सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों के निराकरण के लिए स्पेशल क्लोजर के अधिकार एल-3 और एल-4 स्तर के अधिकारियों को दिए गए हैं, जिसमें यह अधिकारी चाहें तो शिकायतों को शिकायतकर्ता की संतुष्टि परीक्षण के बिना भी शिकायत ख़त्म कर सकते हैं. लेकिन ये अधिकारी 'स्पेशल क्लोजर' करने से कतरा रहे हैं. इस कारण से बड़ी संख्या में शिकायतें पेंडिंग हो रही हैं और व्यवस्था पर अनावश्यक दबाब पड़ रहा है.  

बताया जाता है प्रदेश भर में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें कई माह से भी अधिक समय से बड़ी संख्या में पेंडिंग पाई गई हैं. इसके लिए सरकार ने नाराजगी जाहिर की है. जिला स्तर पर शिकायतों का निराकरण न किए जाने के लिए सम्बन्धित जिम्मेदार अधिकारी शिकायत पेंडिंग क्यों है, की वाजिब वजह तक नहीं बता पा रहे हैं. इसी के साथ एल-3 और एल-4 स्तर के अधिकारियों को 'स्पेशल क्लोजर'  के अधिकार दिए गए हैं, जिसमें यह अधिकारी चाहें तो शिकायतों को शिकायतकर्ता की संतुष्टि परीक्षण के बिना भी शिकायत ख़त्म कर सकते हैं, लेकिन सरकार ने माना है कि ये अधिकारी 'स्पेशल क्लोजर' करने से कतरा रहे हैं. इस कारण से बड़ी संख्या में शिकायतें पेंडिंग हो रही हैं और व्यवस्था पर अनावश्यक दबाब पड़ रहा है.  

बताया जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों का निराकरण करने में असफल रहने वाले अधिकारियों और सम्बन्धित अधीनस्थ अमले का वेतन तक रोक देने की चेतावनी दिए हैं कि वेतन का आहरण तभी संभव होगा, जब सम्बन्धित अधिकारी लम्बित प्रकरणों का निराकरण कर देंगे, बाबजूद इसके बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित हैं, निराकरण नहीं हो रहा. 

समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लम्बे समय से लम्बित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा में निर्देश दिए जाते रहे हैं कि 70 प्रतिशत शिकायतें एल-1 स्तर पर ही निराकृत की जानी चाहिए. इसी प्रकार एल-2 स्तर से एल-3 स्तर पर जाने वाली शिकायतों की संख्या भी 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा एल-4 स्तर तक अपवाद स्वरूप एक या दो शिकायतें ही जानी चाहिए, लेकिन एल-4 स्तर पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें पेंडिंग बताई जा रही हैं.  

ऐसी स्थिति में 'स्पेशल क्लोजर' के लिए मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने निर्देश जारी किये हैं. जारी निर्देशों के अनुसार अब ऐसी समस्त शिकायतें स्पेशल रूप से क्लोज होंगी.
ऐसी समस्त शिकायतें, जिनमें हितग्राही या तो अपात्र है या उसे उस सेवा/योजना का लाभ नीतिगत रूप से नहीं दिया जा सकता.
ऐसी समस्त शिकायतें, जिनमें शासन के आदेश/निर्देश/परिपत्र के अनुक्रम में निराकरण नहीं किया जा सकता.
ऐसी समस्त शिकायतें, जिनमें  सूचना  अधिकार अधिनियम  अंतर्गत जानकारी मांगना या के तहत कार्रवाई की अपेक्षा करना, जिनमें विधिवत आवेदन करना आवश्यक हो और आवेदन नहीं किया  हो. जैसे कि नामांतरण, ड्रायविंग लायसेंस आदि.
ऐसी समस्त शिकायतें, जिनमें माननीय उच्च न्यायालय/ व्यवहार न्यायालय या अन्य  न्यायालयों में प्रकरण प्रचलित हो. 
हालांकि 'स्पेशल क्लोजर' करते समय कारण दर्शाना आवश्यक होगा. 





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