देश में "ब्राम्हण वर्सेस आल" की स्थिति, BJP नेता हितेश बाजपेयी ने कहा 'समाज के नागरिकों में असुरक्षा का भाव बहुत तेज़ी से आ रहा है, जो कि ठीक नहीं'



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"अक्षय-तृतीया" के पुनीत अवसर पर राजगढ़ में "विप्र-समाज" के बीच 

अपनी ही सरकार की विचारधारा के खिलाफ आबाज उठाकर फिर पलट गए मंत्री गोपाल भार्गव के बाद अब मध्यप्रदेश के ख्यात नाम BJP नेता हितेश बाजपेयी ने  "अक्षय-तृतीया" के अवसर पर राजगढ़ में "विप्र-समाज" के बीच कहा है कि अचानक "राजीनीति" को नया रंग लेते देख रहा हूँ. ऐसा नहीं है कि "सवर्ण-समाज" आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियों से नहीं गुजर रहा है. राज्य की अवधारणा "अन्त्योदय" की है, पर कहीं न कहीं इस समाज के नागरिकों में "असुरक्षा" का भाव बहुत तेज़ी से आ रहा है जो कि ठीक नहीं है.

उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है. सोशल मीडिया पर शेयर पोस्ट में कहा गया है कि देश में एक प्रकार से "ब्राम्हण वर्सेस आल" की स्थिति है. आज सवर्ण समाज के लिए भी कुछ करने की जरूरत है...यदि यह "भाव" ठीक है तो उन्हें मदद और सहिष्णुता की नज़र से देखा जाना चाहिए और विचार होना चाहिए और यदि सभी सुद्धिजनों को यह अनावश्यक लगता है जिससे मैं हालांकि सहमत नहीं हूँ, तो शायद "संवाद" की जरूरत है ...अन्यथा "जातिवाद" के जहर से गुजरती इस राजनीति के प्रभाव में पड़कर समाज के युवा कहीं भटक न जाएँ.

जारी पोस्ट में उन्होंने कहा है कि आज के "राजनैतिक-माहौल" में आवश्यक है कि हम ब्राम्हण-समाज को भी साथ लेकर चले, युवाओं को मार्गदर्शन दें, जो चुनौतियां समाज के "विपन्न-अक्षम" युवा सामना कर रहें हैं उन्हें मदद करें जिससे वे "भटकावे' में न आयें.






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