बेशक वेश बदल कर शहर में मत निकलिए, लेकिन आस पास ऐसे लोगों को तो रख ही सकते हैं, जो ईमानदारी से जनता की सुन लें, उचित निराकरण कर दें


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आज भले ही हमारे देश में प्रजातंत्र हो, लेकिन फिर भी कोई एक चाहे वह प्रधानमंत्री के नाम से जाना जाए या मुख्यमंत्री के नाम से या किसी नगर निगम का कोई महापौर या कलेक्टर, सब अपनी जगह पर राजा की तरह होते हैं. यह अलग बात है कि सामान्यतः ये लोग आजकल अपनी जनता के प्रति उतने वफादार नहीं होते, जितने कि होना चाहिए. क्योंकि हम देख रहे हैं आज आम जनता अपने नेता, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री या कलेक्टर से आसानी से मिल भी नहीं पाती. और किसी प्रकार मिल भी ले तो समस्या का निराकरण आसान नहीं होता. बजह यह नहीं है कि इनके पास उतना समय नहीं है, बजह यह है कि यह उतने गंभीर नहीं हैं, जितने कि होना चाहिए. 


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मध्यप्रदेश में इतनी बड़ी घटना हुई सरकार को समय पर पता ही नहीं चला 
यदि ये  नीचे दिए जा रहे उदाहरण का पूरा पूरा अनुपालन नहीं कर सकते, वेश बदल कर जनता की समस्याएं जानना इनके वश का नहीं है तो कम से कम अपने आस पास ऐसे लोगों को तो रख ही सकते हैं, जो ईमानदारी से जनता की सुन लें, उचित निराकरण कर दें. खैर यह तो अभी बड़ा सपना है. आप तो किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के मेयर अल्बेक इबराइमूव के काम को देखिये, निश्चय ही सराहना किये बगैर नहीं रह सकेंगे.

मेयर अल्बेक के बारे में यह जानकारी मिलने के बाद लोगों ने उन्हें
मेयर अल्बेक इबराइमूव अपने विभाग का कामकाज
बेहतर ढंग से करने के कारण चर्चित
सड़कों पर खोजने की कोशिश की, लेकिन वे उन्हें नहीं मिले. इस बारे में वे कहते हैं, मैं दाढ़ी लगा लेता हूं, सिर पर विग पहन लेता हूं और पुराने कपड़े पहन लेता हूँ. इसके बाद मुझे पहचान पाना किसी के भी लिए मुश्किल होता है. उनका कहना है कि ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक हम लोगों के बीच नहीं पहुंचते, वास्तविक समस्याएं सामने नहीं आ पातीं. कई बार ऐसा होता है कि लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए परेशान होना पड़ता है, लेकिन उन्हें उसका उपाय पता नहीं होता है.


किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के मेयर अल्बेक इबराइमूव अपने विभाग का कामकाज बेहतर ढंग से करने के कारण वहां चर्चित हैं. वे सप्ताह में किसी भी दिन बिना बताए वेश बदलकर सड़कों पर निकल जाते हैं. बाजार में जाते हैं और आम लोगों से उनकी समस्याएं पूछते हैं. वे यह भी पता करते हैं कि लोग किस विभाग के कामकाज से नाराज हैं या ऐसी कौन सी समस्या है, जो लंबे समय से दूर नहीं हो रही है. ऐसी जानकारियां वे अपने सादे कागज पर लिख लेते हैं और फिर अपने ऑफिस पहुंचकर संबंधित विभाग के अफसरों की क्लास लेते हैं. साथ ही तय समय सीमा में वह कार्य पूरा करने के निर्देश जारी करते हैं. 

Edited : दृष्टि सक्सेना 
उदाहरण न्यूज़ mir24.tv से 




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