आखिर यशवंत ने BJP छोड़ी, बताया 'लोकतंत्र खतरे में, बचाने करेंगे काम'



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''भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की लम्बे समय से आलोचना करते रहने के बाद भी बागी नेता यशवंत सिन्हा को BJP बाहर का रास्ता नहीं दिखा सकी. यह भी सवाल है कि पार्टी आखिर खुली खिलाफत के बाद भी उन्हें क्यों झेल रही थी? और अभी भी कई ऐसे लोग पार्टी के अन्दर हैं, जो खुले आम सार्वजनिक रूप में पार्टी की फजीहत करते रहते हैं, लेकिन पार्टी उन्हें झेलने के लिए मजबूर है. इससे पार्टी की कमजोरी उजागर हो रही है कि कहीं न कहीं भीतर से वह कमजोर है. सभी एक जैसे नहीं होते कि कितना भी अपमान करो झेलते रहें. अब लोग कह रहे हैं निकालते तो और बात होती, निकल गए तो और बात है ..'' 

BJP में बागी के तौर पर पहचाने जाने लगे नेता यशवंत सिन्हा ने आखिरकार पार्टी छोड़ने का आज ऐलान कर दिया. पूर्व केन्द्रीय मंत्री वरिष्ठ BJP नेता श्री सिन्हा ने कहा मैं भाजपा का पद छोड़ रहा हूं. भाजपा के साथ सभी संबधों को आज समाप्त करता हूं, भविष्य में मैं किसी पद का दावेदार नहीं हूं. हालांकि इसके पीछे उन्होंने बजह बताई कि आज से चार साल पहले ही मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं और अब मैंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया है. 

उन्होंने यह भी कहा कि मैं आज के बाद किसी दल के साथ नहीं रहूंगा न ही किसी भी राजनितिक दल से कोई रिश्ता रखूंगा, लेकिन उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है इसे बचाने के लिए मैं आंदोलन करूंगा. भारतीय जनता पार्टी से मेरा रिश्ता खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा कि जब देश मुसीबत में था पटना ने रास्ता दिखाया था. आज भी देश को पटना ही रास्ता दिखाएगा. सिन्हा ने कहा कि गुजरात चुनाव के कारण संसद का सत्र छोटा किया गया, देश में ऐसा कभी नहीं हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि आज देश की हालत चिंताजनक है. 

श्री सिन्हा पटना में श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में राष्ट्र मंच के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. यहाँ उन्होंने कहा कि अभी जो स्थिति बन गई है इसमें सभी को एकजुट होने की जरूरत है. अगर हम आज एकजुट न हुए तो आने वाली पीढ़ी हमें इसके लिए माफ नहीं करेगी. उन्होंने देश में जारी कैश की किल्लत के लिए वित्त मंत्री अरूण जेतली और आरबीआई जिम्मेदार ठहराया. 

श्री सिन्हा पिछले कुछ महीनों से मोदी सरकार पर तीखे हमले करते रहे हैं और कई मुद्दों पर सरकार को घेरा भी है. श्री सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्ट्र मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी. तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा. 

राष्ट्र मंच सम्मेलन, जिसे गैर भाजपा दलों की बैठक ज्यादा माना जा रहा है, में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और आशुतोष, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी और राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी जयंत सिंह, BJP नेता शत्रुघ्न सिन्हा, तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिनेश त्रिवेदी, आरजेडी के तेजस्वी प्रसाद यादव, आरएलडी नेता जयंत चौधरी, असंतुष्ट जेडी (यू) नेता उदय नारायण चौधरी प्रमुख रूप से शामिल हुए. माना जा रहा है श्री सिन्हा का मकसद एनडीए सरकार के खिलाफ विभिन्न दलों को एक मंच पर लाना है.

माना जा रहा है श्री सिन्हा अपनी पूरी रणनीति तैयार कर चुके हैं. पूरी प्लानिंग के साथ वह बाहर आये हैं. बहुत जल्द और भी उनके साथी पार्टी छोड़ सकते हैं. उन्होंने भाजपा सांसदों से अपील भी की है कि राष्‍ट्रीय हितों के लिए आपको अपनी आवाज उठानी चाहिए. अगर अब खामोश रहे तो आने वाली पीढिय़ां आपको माफ नहीं करेंगी.

यहाँ उल्लेखनीय है कि लम्बे समय से विरोध करते रहने के बाद भी BJP उन्हें बाहर का रास्ता नहीं दिखा सकी. यह भी सवाल है कि पार्टी आखिर विरोध के बाद भी उन्हें क्यों झेल रही थी? और अभी भी ऐसे लोग पार्टी के अन्दर हैं, जो खुले आम पार्टी की फजीहत करते रहते हैं, लेकिन पार्टी उन्हें झेलने के लिए मजबूर है. इससे पार्टी की कमजोरी उजागर हो रही है. 

नेशनल न्यूज़ डेस्क   




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