बदली भाजपा, बदल गया कार्यकर्ता, एक बार फिर लुटिया डुबोने तैयार

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''मैं दावे से कह सकता हूँ कि शिवराज सिंह सरकार अब नहीं आ रही है. भीतरघात से जूझती कांग्रेस काे यह जानकर खुशी हाे रही हाेगी कि अब भाजपा में भी भीतरघात हाेने जा रहा है... बदली भाजपा आैर बदल गया अब कार्यकर्ता... उसके साथ छल कर सत्ता तक पहुंचाने वाले हाथाें से जब काेई सिफारिशों जाती हैं ताे काेई नही सुनता है आैर वही काम दलाल के जरिए जाता है ताे हाे जाता है.... यह वेदना में शामिल कार्यकर्ताआें ने तय कर लिया है कि वह सबक सिखाने काे तैयार हैं!''
                                                                                                   उमाशरण श्रीवास्तव 

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय श्री सुंदर लाल पटवा जी की 1990 में सरकार थी, पटवा सरकार ने किसानाें के कर्ज माफ किये आैर माफिया किस्म के लाेगाे काे सरकार हाेने का जबरदस्त अहसास कराया था! राजधानी भाेपाल समेत बड़े शहराें से लेकर नगर तक के अतिक्रमण पर बुलडोजर चला दिये! सरकार की साख भी थी आैर इसी दाैरान दिल्ली ने श्री राम जन्म भूमि आंदाेलन के नाम पर बाबरी मसजिद ढहाये जाने के बाद हुये दंगाें की आड़ लेकर सरकार काे भंग कर दिया! 

सरकार हाई कोर्ट गई, दिल्ली के फैसले काे गलत ठहरा दिया आैर मध्य प्रदेश के जन-जन की सहानुभूति सरकार के साथ हाे गई थी, पर 1993 में जब विधानसभा के चुनाव हुये तब पटवा जी द्वारा किये गये कामाें पर पानी फेर गया, आैर तब के कांग्रेस नेता श्री अर्जुन सिंह जी की कूटनीति सफल हाे गई आैर कांग्रेस की वापसी हाे गई, सब समझ रहे थे कि पटवा जी द्वारा गाै हत्या पर प्रतिबंध भी किया था, फिर भी सरकार चली गई, भाजपा आैर उसके नेता चिंता में पड़ गये कि इतने सारे काम करने के बाद सरकार चली गई! 

तब एक छाेटी सी मुलाकात में तब के पहली बार बुधनी से विधायक बने शिवराजसिंह जी ने उनकाे दिलीप सूर्यवंशी जी के घर तक छोडने के सफर में कहा था कि पटवा जी ने बेहतरीन प्रशासन दिया, आैर बहुत काम किये पर उनके मंत्री मंडल के साथियाें ने लुटिया डूबा दी, क्याेंकि वे किसी भी कार्यकर्ता की सुनते ही नहीं थे, राज्य मंत्री के हाल यह थे कि वे किसी का काम करा ही नही पाते थे, आैर केबीनेट मंत्री के हाल यह थे कि उनकी विभाग के सचिव सुनते ही नहीं थे, सत्ता पूरी पटवा जी के हाथ में थी, अफसरशाही का आलम यह था कि विधायक मंत्रीगणाें का राेना राेते रहते थे, कुल मिलाकर वही नक्शे कदम पर शिवराज सिंह चल रहे हैं जाे कि अफसराें की सुन रहे हैं, आैर कार्यकर्ता ठगा सा महसूस करता है कि यही वह भाजपा है, जिसे उसने दिन रात मेहनत कर यहां तक पहुंचाया! 

1993 की तर्ज पर काम कर रहे शिवराज सिंह सरकार आैर उनके मंत्रीगणाें ने अपने कार्यकर्ताआें काे कुछ नही दिया, यही कारण है कि शिवराज सिंह सरकार अब जा रही है ताे बहुत काम करने के बाद भी कार्यकर्ता खुश नही है......... वह अपने नेताआें काे दलालाें चापलूसाें से घिरा देखकर दुखी है आैर उसने मन ही मन तय कर लिया है कि अब वह साथ ताे रहेगा पर काम नही करेगा आैर न ही घर -घर जाकर वाेट की भीख ही मांगेगा! मंत्री गणाें के आस पास रहने वालाें के जीसीवी डंपर आैर नई -नई गाड़ियां आ गई है आैर वह वैसा ही है जैसा कि उसे झंडे बैनर लगाने की जिम्मेवारी दी जाती थी, कार्यकर्ता की यह पीड़ा कई बार पार्टी के सामने आई पर सब बैठकाें के बाद वैसे ही हाे जाते रहे, तब एक नही हजाराें पुराने लाेगाें ने मुझे यह पीड़ा सुनाई है. 

रही बात मेरी ताे मैं कांग्रेस का ताे हूं नही आैर सच कहने के कारण सच स्वीकार न कर पाने के कारण भाजपा अपना मानती नही, तब मैं दावे से कह सकता हूँ कि शिवराज सिंह सरकार अब नही आ रही है. भीतरघात से जूझती कांग्रेस काे यह जानकर खुशी हाे रही हाेगी कि अब भाजपा में भी भीतरघात हाेने जा रहा है............ बदली भाजपा आैर बदल गया अब कार्यकर्ता ........उसके साथ छल कर सत्ता तक पहुंचाने वाले हाथाें से जब काेई सिफारिशों जाती हैं ताे काेई नही सुनता है आैर वही काम दलाल के जरिए जाता है ताे हाे जाता है.... यह वेदना में शामिल कार्यकर्ताआें ने तय कर लिया है कि वह सबक सिखाने काे तैयार हैं!


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