चर्चा उनकी भी हो, जो फैला रहे हैं अंधेरों में रोशनी




''ख़ास बन गए लोग ज़रा भी कुछ कर दें तो चर्चा दुनिया में 
आम लोग बहुत ख़ास काम भी कर दें तो कोई ख़ास बात नहीं''

''अपने पूरे कार्यकाल के दौरान संसद में मात्र आठ प्रतिशत उपस्थित रहने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपना पूरा वेतन 90 लाख रुपये भारत सरकार को दान दे दिया है. खबर खूब चर्चा में है. मोदी जी ने उनके साथ फोटो भी खिचाया है. लेकिन...''

यह हम सब अच्छे से जानते हैं कि एक सचिन ही नहीं, देश में कईयों इस तरह के लोग हैं, जो अभाव में भी बड़े बड़े काम कर रहे हैं, पर चर्चा कुछ ख़ास की ही होती है. सचिन ने जो किया उसे कम नहीं आंक रहे, लेकिन उन्हें भी ढूंढा जाकर समुचित सम्मानित किया जाना चाहिये, जो सचिन से कई गुना आगे रहकर अँधेरे में रोशनी फैला रहे हैं. 

उन्हीं में से एक हैं प्रो.टी.के लहरी. डॉ. लहरी बीचयू के अवकाश प्राप्त चिकित्सक हैं, लेकिन नियमित रूप से वे बीएचयू को दे रहे हैं और मरीज भी उनके अनुभव का लाभ ले रहे हैं. लेकिन डॉ. लहरी बदले में कुछ भी नहीं ले रहे हैं. इनके जैसे डॉक्टर्स को ही धरती का भगवान कहा जाता है. आज जब तमाम डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़कर प्राइवेट प्रैक्टिस से करोड़ो का अस्पताल खोलने में दिलचस्पी लेते हैं, उस दौर में बीएचयू के प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट पद्मश्री डॉ. टी के लहरी साहब मिसाल खड़ी करते हैं. गरीब मरीजों के लिए ये शख्सियत किसी देवता से कम नहीं.

रिटायरमेंट के चौदह साल बाद भी पेसेंट्स की सेवा कर रहे हैं. गरीबों कि सेवा करने के लिए इन्होने शादी नहीं की.1997 से इन्होंने सैलरी लेना बंद कर दिया और अपनी सैलरी को जरूरतमंद मरीजों को डोनेट कर दिया. 1997 में इनकी सैलरी एक लाख के ऊपर थी. 2003 में रिटायरमेंट के बाद इन्हें जो पेंशन और पीएफ मिला, वो भी इन्होंने बीएचयू को मरीजों की सेवा के लिए डोनेट कर दिया. ये केवल खाने के खर्च के लिए पेंशन से काम चलाते हैं.. मैं ऐसे चिकित्सक को सलाम करता हूं.

@ अनिरुद्ध पाण्डेय 





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