नर्मदा किनारे वृक्षारोपण में कोई घोटाला नहीं हुआ, 90 परसेंट पेड़ सुरक्षित - मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान



''नर्मदा किनारे वृक्षारोपण में रोप गए पेड़ों में से 90 परसेंट पेड़ सुरक्षित हैं। यह बात आज मंत्रालय में नर्मदा सेवा मिशन के अंतर्गत सम्पन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही है। यानि की यह माना जाए कि ''नर्मदा किनारे वृक्षारोपण में कोई घोटाला नहीं हुआ।''

भोपाल। पर्यावरण और नदी संरक्षण के लिये राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास के साथ प्रकृति को बचाने का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किया जा रहा है। नर्मदा सेवा मिशन के अंतर्गत रोपे गये पौधों की गर्मी के मौसम में सुरक्षा के समुचित उपाय करने के निर्देश दिये हैं। मंत्रालय में नर्मदा सेवा मिशन के अंतर्गत सम्पन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक में यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 मई को नर्मदा सेवा मिशन का एक साल पूरा हो रहा है। इस अवसर पर नर्मदा सेवा समितियों का सम्मेलन आयोजित किया जाये, इसमें नागरिकों को नर्मदा सेवा मिशन के कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट दी जाये। लोगों को नर्मदा की स्थिति और परिस्थिति में आये सकारात्मक परिवर्तन की जानकारी दी जाये। इस मौके पर बताया गया कि नर्मदा नदी के किनारे स्थित 11 औद्योगिक इकाईयों से होने वाले प्रदूषण पर पूरी तरह से रोक लग गयी है। अब इन इकाईयों से किसी प्रकार का प्रदूषित जल नर्मदा में नहीं मिल रहा है। नर्मदा जल की गुणवत्ता की लगातार 50 स्थानों पर निगरानी की जा रही है।

श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा मिशन के माध्यम से नर्मदा नदी को जीवंत बनाये रखने के लिये सरकार ने अत्यंत पुनीत कार्य हाथ में लिया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती नर्मदा के किनारे रोपित पौधों को बचाने की है। उन्होंने कहा कि आम लोगों, किसानों और नर्मदा सेवा समितियों की जागरूकता और सजगता से 90 प्रतिशत पौधे जीवित अवस्था में है। श्री चौहान ने कहा कि बरसात के पहले पौधों की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपने खेतों में फलदार पौधे रोपने वाले किसानों को शेष प्रोत्साहन राशि का शीघ्र वितरण सुनिश्चित किया जाये।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि विभिन्न विभागों के सहयोग से नर्मदा से लगे 16 जिलों में नदी संरक्षण के अभूतपूर्व कार्य हुये हैं। पंचायत विभाग द्वारा 42 सामुदायिक शौचालय निर्मित किये गये हैं। कृषि विभाग द्वारा 1518 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की गई है। परम्परागत कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैविक खेती में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुये भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में जैविक खेती के लिये 10 हजार संकुल स्वीकृत किये जा रहे हैं। कृषि अपशिष्ठ से बिजली बनाने के संयंत्र स्थापित करने के लिये लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि वानिकी में 75 लाख से ज्यादा पौधे खेतों की मेढ़ों पर रोपे गये हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नर्मदा किनारे बसे सभी नगरों में कचरा पेटियाँ लगाई गई हैं। साथ ही प्रत्येक निकाय को दो-दो मोबाईल टॉयलेट उपलब्ध करवाये गये हैं। जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने का प्लांट स्थापित किया जायेगा। इसके अलावा 19 सार्वजनिक शौचालय, 27 चेंजिंग रूम और 19 विसर्जन घाट बन चुके हैं। नदी के संरक्षण के लिये 20 नगरीय निकायों में सीवरेज परियोजना प्रस्तावित हैं। इनमें 7 नगरीय निकायों में कार्य प्रगति पर है, जिनमें नेमावर, बुधनी, शाहगंज, मण्डलेश्वर, अमरकंटक, डिण्डौरी एवं जबलपुर शामिल हैं। इस दौरान बताया गया कि नदी के किनारे के सभी गाँव 30 जून तक खुले में शौच से मुक्त हो जायेंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल दो जुलाई को 6 करोड़ 67 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य था। विभिन्न विभागों द्वारा लक्ष्य के विरूद्ध 7 करोड़ 9 लाख पौधों का रोपण किया गया। इनमें से 90 प्रतिशत पौधे जीवित हैं। सबसे ज्यादा पौधारोपण वाले जिलों में मण्डला, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, देवास, हरदा, खरगोन, जबलपुर, अलिराजपुर, धार और डिण्डौरी हैं।

बैठक में मुख्य सचिव बी.पी. सिंह, जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डे और राघवेन्द्र गौतम, अपर मुख्य सचिव वन दीपक खांडेकर, अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास इकबाल सिंह बैस, अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी रजनीश वैश्य एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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