तांत्रिक शक्ति जज से बार बार फैसला पलटवा रही थी, फिर हुआ कुछ ऐसा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के जज बन गए तांत्रिक






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देश की आजादी से पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक न्यायधीश हुआ करते थे Sir John Woodroffe. एक मुकदमे की सुनवाई के बाद बार-बार अपना ही फैसला बदलते गए। स्टेनो हैरान। तभी उसे अंदेशा हुआ कि कोई तंत्र-शक्ति न्यायधीश महोदय से ऐसा करवा रही है। न्यायधीश महोदय को पहले तो अपने स्टेनो की बात नागवार गुजरी। पर उनके लिए भी यह शोध का विषय था कि फैसला करते वक्त उनका मिजाज बार-बार क्यों बदला? लिहाजा उन्होंने तंत्र पर शोध किया। यह जानने के लिए कि क्या तंत्र की शक्ति किसी का मिजाज बदल सकती है? उन्होंने इसके लिए नौकरी तक छोड़ दी। फिर किसी सिद्ध संन्यासी को गुरू बनाया और खूब अध्ययन किया। अंतत: वे कुंडलिनी जागरण और तंत्र की शक्ति जान गए। फिर तो यह भी जान गए कि जज रहते बार-बार फैसला क्यों बदला था।

खैर, सर जॉन वुडरफ को तंत्र-शक्ति का ऐसा ज्ञान हुआ कि आज भी उन्हें तंत्र विद्या पर लिखी गई कालजयी पुस्तक “The Serpent Power” के लिए याद किया जाता है। यह पूरी दुनिया में तंत्र पर अंग्रेजी में लिखी गई पहली प्रामाणिक पुस्तक है। इसके पहले तंत्र पर केवल संस्कृत में पुस्तकें उपलब्ध थीं। सर जॉन वुडरफ ने ही पहली बार दुनिया को बताया कि तंत्र कोई सामान्य जादू-टोना नहीं, बल्कि विज्ञान है। परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने कई साल पहले रिखियापीठ में सत्संग के दौरान यह बात बताई थी।

@ किशोर कुमार      




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