सुप्रीम कोर्ट के संशोधनों को लागू करने के आदेश पर गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने रोक लगा दी, ब्राह्मण समाज में रोष, कहा बेबकूफ बना रही है सरकार



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ब्राम्हण इतना मूर्ख नहीं कि कथनी और करनी 

के इतने मोटे अंतर को न समझे,


जो सरकार भगवान राम की, भगवान् परशुराम 

की न हुई तुम्हारी क्या होगी?


SC-ST Act का दुरुपयोग को रोकने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए संशोधनों को मोदी सरकार और भाजपा प्रदेश सरकारें मानने को राज़ी नहीं हैं. केंद्र सरकार पहले ही संशोधनों को खारिज करने के लिए रिव्यू पिटीशन दाख़िल कर चुकी है और उसके बाद एक बार और सुप्रीम कोर्ट से अपील भी कर चुकी है. अब भाजपा की प्रदेश सरकारें सीधे मोदी-शाह की इच्छानुसार संशोधन के अनुरूप जारी अपने निर्देशों को वापस लेकर रिव्यू पिटीशन में पार्टी बनने जा रही हैं. 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए संशोधनों को प्रदेश में लागू करने के आदेश पर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने आज मंगलवार को रोक लगा दी. जारी आदेश में कहा गया है कि चूंकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से SC-ST एक्ट पर अपने आदेश वापिस लेने का आग्रह किया है, इसलिए जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक यह स्थगित रखा जाता है. 

मामले को लेकर विशेषकर ब्राह्मण समाज में रोष है. कहा जा रहा है SC-ST Act काभयावह रूप से दुरुपयोग हो रहा है और भाजपा की सरकार जो राममंदिर के नाम पर खड़ी हुई और उसके बाद दशकों से कोर्ट के आदेश के नाम पर राममंदिर नहीं बना रही, वही भाजपा SC-ST एक्ट में उसी सुप्रीम कोर्ट के ज़रा से संशोधन को दलित राजनीति के लिए मानने के लिए राज़ी नहीं और आनन -फ़ानन अध्यादेश तैयार कर रही है.  

कहा जा रहा है कि इतनी बेशर्मी तो कभी मायावती ने भी नहीं दिखाई. ऐसी पार्टी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भले दिखावे के लिए परशुराम जयंती पर चले जाएँ, पर ब्राम्हण इतना मूर्ख नहीं कि कथनी और करनी के इतने मोटे अंतर को न समझे. अब अगले चुनाव में जनता ख़ासकर अगड़े भाजपा के इस नए "बसपा संस्करण" को कितना पसन्द -नापसंद करेगी, उससे इन्हें अपनी इस रणनीति का खोखलापन समझा आएगा, लेकिन इतना तय है कि जो राम का नहीं, जो परशुराम का नहीं, वह हिन्दू हित विरोधी है. कहा जा रहा है जो राम-परशुराम का न हुआ, वह आपका क्या होगा?

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC-ST एक्ट संशोधन के आदेश दिए थे. इसके बाद भड़की हिंसा के बाद पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों के एसपी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC-ST एक्ट पर किए गए संशोधनों को प्रदेश में लागू करने के आदेश जारी कर दिए गए थे. 

@ आलोक बाजपेयी    




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