ग्वालियर में सैकड़ों पत्रकार धोखाधड़ी के बने शिकार, बीजेपी नेताओं ने फंसाया, मुख्यमंत्री से लगा रहे मदद की गुहार

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ग्वालियर से राकेश अचल     
ग्वालियर में सैकड़ों की संख्या में पत्रकार ग्वालियर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और ग्वालियर के बेईमान नेताओं के कारण दस साल से धोखाधड़ी के शिकार होकर भटक रहे हैं. इन गरीब पत्रकारों का माई बाप, न कोई अखबार का घराना है, और न कोई राजनीतिक दल. 

असल में ग्वालियर के पत्रकारों को ग्वालियर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने संघ प्रचारक रहे वरिष्ठ पत्रकार मामा माणिकचंद बाजपेयी के नाम से एक पत्रकार कालोनी में अलग-अलग आकार के भूखंड बेचे. पत्रकारों ने अपनी बचत से, बैंक से ऋण लेकर जैसे तैसे इन भूखंडों की रजिस्ट्री कराई. प्राधिकरण ने कालोनी में तीन-चार करोड़ रूपये खर्च कर वहां सड़क, बिजली, सीवर और पानी का प्रबंध भी कर दिया. कुछ पत्रकारों को बाकायदा भूखंडों का कब्जा भी दिला दिया. लेकिन अचानक एक दिन एक आम किसान ने इस कालोनी की जमीन पर अपना मालिकाना हक बताकर अदालत में मामला दर्ज करा दिया

मामला दर्ज होने से पहले तक जिला प्रशासन और प्राधिकरण कान में तेल डाल कर बैठे रहे. जिला प्रशासन ने प्राधिकरण को जमीन देते समय कहा था जमीन अविवादित है, तभी प्राधिकरण ने पैसे जमा कराये, भूखंड विकसित किये और बेचे, लेकिन अब सबने हाथ खड़े कर लिए हैं. अब न जिला प्रशासन अदालत के सामने तन कर खड़ा हो रहा है और न प्राधिकरण, बेचारे पत्रकार एक तरफ कर्ज के बोझ से दबे हैं और दूसरी तरफ भूखंड भी उनके हाथ में नहीं है.

बताया जा रहा है कि पत्रकारों की जमीन पर कब्जा बताने वाला पक्षकार भाजपा के स्थानीय नेताओं का पैदा किया गया है. इस मामले में सरकारी वकील भी भाजपा के एक नेता के कारिंदे का रिश्तेदार है, अदालत में सब मिलजुल कर प्राधिकरण को मुकदमा हराना चाहते हैं. पत्रकारों के पास न पैसा है और न समय की हम इस अदालती लड़ाई में शामिल हों, इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले में दखल देकर निरीह पत्रकारों को उनके भूखंड वापस दिलाएं. 

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