मंत्री दर्जा से घटेगा साधू संतों का सम्मान, प्रस्ताव ठुकराने बना रहे दबाब, यदि ऐसा हुआ तो सरकार की किरकिरी तय

प्रदेश के विभिन्न मठ मंदिरों से जुड़े महन्त और सन्यासी भोपाल में बोले ''शिवराज ने अपने गुनाह छिपाने के लिए समिति बनाकर पद बांटे''

साधू संतों की विश्वसनीयता पर ऐसे राजनैतिक संतों के कारण विपरीत प्रभाव पड़ता है. मुख्यमंत्री तो राजनैतिक व्यक्ति है और दुबारा सत्ता प्राप्ति के लिए किसी के भी प्रभाव का सदुपयोग या दुरुपयोग कर सकते हैं, लेकिन संतों को इस बारे में गहन विचार करना चाहिए था कि उनके किसी आचरण के कारण आम आदमी की आस्था और संतों के प्रति समर्पण कम न हो जाये. इस प्रकार की बात करते हुए प्रदेश भर के साधू संतों ने शिवराज सरकार द्वारा राज्य मंत्री का दर्जा पाने वाले 5 बाबाओं पर दबाब बनाना शुरू कर दिया है. उन पर मंत्री दर्जा स्वीकार नहीं करने के लिए दबाब बनाया जा रहा है. यदि ऐसा हुआ तो शिवराज सरकार की किरकिरी होना तय है.  

शिवराज सरकार द्वारा राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने वाले 5 बाबाओं पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. फैसले पर प्रदेश के अन्य संत भी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.  शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सरकार के इस कदम को स्वार्थ भरा फैसला बताया है. प्रदेश के विभिन्न मठ मंदिरों से जुड़े महन्त और सन्यासी भोपाल में जुटे और मठ-मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की. उन्होंने साधुओं को मंत्री दर्जा दिए जाने को गलत बताया. संतों का कहना था कि शिवराज ने अपने गुनाह छिपाने के लिए समिति बनाकर पद बांटे हैं. उनकी नर्मदा यात्रा एक आडम्बर थी, उसमें सत्ता का दुरुपयोग किया गया है. 

साधु संतों की संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी सरकार के इस फ़ैसले से असहमति जताई है. परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने संतों और महंतों द्वारा मंत्री दर्जा लिए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि संत मंत्री दर्जा वापस करें, नहीं तो जनता में सम्मान घटेगा. उन्होने कहा है कि संत का दर्जा मंत्री से बड़ा होता है. अगर संत मंत्री हो जाएं तो कैसा सम्मान! महन्त नरेंद्र गिरी ने शिवराज सरकार द्वारा संतों को लालच दिए जाने की भी निंदा की है. 

पार्टी के भीतर नाराजगी, जिताने के लिए दबाव हम पर और मलाई बाबाओं को

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में अब तक मौन साधे हुए हैं, लेकिन पार्टी के भीतर उनके इस फैसले से नाराजगी है. पार्टी में बड़े पदों पर बैठे नेता कानाफूंसी कर रहे हैं तो वहीँ नवभारत टायम्स के अनुसार  प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर बैठे एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि 'चौथी बार पार्टी को जिताने के लिए हम पर दबाव बनाया जा रहा है और मलाई बाबाओं को खिलाई जा रही है. हम केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाएंगे.' 


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc