'हमें भी खिलाओ, नहीं तो हम खेल बिगाड़ेंगे', 'रस्सी जल गई पर बल नहीं गया' मि. बंटाढार

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''कांग्रेस में दिग्विजय गुट प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो चाह रहा है, लेकिन उसमें मुख्यधारा में, न. वन पर वो हो. मतलब साफ है कि 'हमें भी खिलाओ, नहीं तो हम खेल बिगाड़ेंगे'. प्रदेश में बीजेपी की राह आसान करने और कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ही एकमात्र कारण बताये जाते हैं. वे प्रदेश की जनता में वे मि. बंटाधार के नाम से जाने जाते हैं. और अब 2018 के चुनाव में दिग्विजय सिंह की सक्रियता कांग्रेस को नुकसान ही पहुंचाएगी. ऐसा न हो कि सामने आई थाली खिसक जाए.'' 
सीधी बात @  बलभद्र मिश्रा
  
इसमें कोई शक नहीं कि आज 4 साल से सत्ता से दूर रह कर भी कांग्रेस में 'रस्सी जल गई पर बल नहीं गया' की स्थिति है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी इस स्थिति में भी थमने का नाम नहीं ले रही है. यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हुए भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश में कांग्रेस का चेहरा घोषित नहीं कर सके, जबकि इसी पद के दूसरे दावेदार कमलनाथ ने उनका समर्थन कर दिया था. मध्यप्रदेश में कांग्रेस के मि. बंटाढार बताये जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और फैसला टल गया. 

खबर है कि राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला करने के लिए अपने स्तर से जानकारी जुटाई थी, उसके अनुसार प्रदेश की जनता केवल और केवल सिंधिया को चाह रही है, यह बात सामने आने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंधिया को मध्यप्रदेश में कांग्रेस का चेहरा घोषित करने पर सहमति बनाने हेतु राज्य के पार्टी नेताओं की दिल्ली में बैठक बुलाई थी. बैठक में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रतिपक्ष के नेता राहुल सिंह के अलावा कुछ और नेताओं ने भी हिस्सा लिया था. 

खबर है कि जब राहुल गांधी ने इस प्रकार की बात उठाई तो राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए सिंधिया लोगों को अपने साथ लेकर नहीं चल सकेंगे, बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी असहमति दर्ज कराई. मगर कमलनाथ दिग्विजय की इस बात से सहमत नहीं थे. उन्होंने कहा कि सिंधिया जनता की पसंद हैं. 

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सिंधिया के नाम का यह कहते हुए विरोध किया कि उनका ग्वालियर से बाहर कोई प्रभाव नहीं. उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह एवं अजय सिंह लगातार इस प्रयास में थे कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस बिना चेहरे के चुनाव लड़े. अंतत: वो इसमें सफल भी हो गए. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में दिग्विजय गुट प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो चाह रहा है, लेकिन उसमें मुख्यधारा में, न. वन पर वो हो. मतलब साफ है कि 'हमें भी खिलाओ, नहीं तो हम खेल बिगाड़ेंगे'. 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बीजेपी की राह आसान करने और कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ही एकमात्र कारण बताये जाते हैं. वे प्रदेश की जनता में वे मि. बंटाधार के नाम से जाने जाते हैं. और अब 2018 के चुनाव में दिग्विजय सिंह की सक्रियता कांग्रेस को नुकसान ही पहुंचाएगी. ऐसा न हो कि सामने आई थाली खिसक जाए. 

janjagran.net से 

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