2 बाबाओं ने ठुकराया राज्य मंत्री का दर्जा, सरकार की किरकिरी, 3 बाबाओं पर राजनैतिक मोह भारी पड़ा





भोपाल. जैसा कि माना जा रहा था आखिर 2 बाबाओं ने सरकार का राज्य मंत्री का दर्जा ठुकरा दिया है. उन पर अन्य साधू समाज का भारी दबाब था. इससे सरकार की किरकिरी हो रही है. वहीं अन्य 3 बाबाओं पर राजनैतिक मोह भारी पड़ा है. राज्यमंत्री का दर्जा लेने के बाद पहली बार भोपाल आए नर्मदानंद महाराज ने पद के औचित्य के सवाल पर कहा कि मैं अभी इसी वक्त राज्यमंत्री दर्जा त्यागता हूं. उन्होंने कहा कि मैंने कभी पद नहीं स्वीकारा. वहीं आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज ने भी इस पद को स्वीकार करने से इन्‍कार कर दिया है.

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उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पिछले दिनों नर्मदा नदी संरक्षण समिति का सदस्य बनाकर भय्यू महाराज, नर्मदानंद, कंप्यूटर बाबा, हरिहरानंद और पं. योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था. इन संत-बाबाओं ने पिछले साल हुए साढ़े छह करोड़ पौधरोपण मामले में नर्मदा घोटाला यात्रा निकालने की धमकी दी थी. इसके बाद उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था. इसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था.

इसके बाद से ही  अन्य साधू संतों मुखर हुए और कहा था कि इससे साधू संतों की विश्वसनीयता पर ऐसे राजनैतिक संतों के कारण विपरीत प्रभाव पड़ता है. मुख्यमंत्री तो राजनैतिक व्यक्ति है और दुबारा सत्ता प्राप्ति के लिए किसी के भी प्रभाव का सदुपयोग या दुरुपयोग कर सकते हैं, लेकिन संतों को इस बारे में गहन विचार करना चाहिए था कि उनके किसी आचरण के कारण आम आदमी की आस्था और संतों के प्रति समर्पण कम न हो जाये. इस प्रकार की बात करते हुए प्रदेश भर के साधू संतों ने शिवराज सरकार द्वारा राज्य मंत्री का दर्जा पाने वाले 5 बाबाओं पर दबाब बनाना शुरू कर दिया था . उन पर मंत्री दर्जा स्वीकार नहीं करने के लिए दबाब बनाया जा रहा था. 

दुसरी ओर सरकार का प्रयास था कि ऐसा न हो, क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो शिवराज सरकार की किरकिरी होना तय है. लेकिन वह सफल नहीं हो सकी और नर्मदानंद महाराज सहित आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज ने भी राज्यमंत्री का दर्जा ठुकरा दिया है. शेष तीन बाबाओं पर राजनैतिक मोह भारी पड़ा है. इसी के साथ नर्मदा नंद महाराज ने कम्प्यूटर बाबा पर हमला बोलते हुए कहा है कि कम्प्यूटर बाबा फर्जी बाबा हैं. वे लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं. वे मेरे साथी नहीं हो सकते.

दुसरी ओर मंत्री दर्जा छोड़ने के सवाल पर कम्प्यूटर बाबा ने कहा है कि मैं राज्य मंत्री का दर्जा नहीं छोड़ूंगा. मुझे अभी नर्मदा नदी को लेकर काम करना है और इसके लिए अधिकारियों से बातचीत करने की जरूरत पड़ेगी. नर्मदानंद द्वारा फर्जी बाबा कहने पर वे बोले कि यह उनका निजी मत है, मुझे अपने काम से मतलब है.

आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज ने भी बातों-बातों में इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उनका कहना है नर्मदा हमारी आस्था, श्रद्धा और संस्कार का प्रतीक है. नर्मदा की सेवा समाज की सेवा है. उन्होंने कहा जबसे उन्हें राज्यमंत्री का पद देने की सूचना मिली तब से उन्होंने इस पद का कोई उपयोग या उपभोग नहीं किया. उन्होंने कहा मैंने मानवता की सेवा का संकल्प लिया है. उससे बड़ा कोई पद नहीं है. भय्यू महाराज के निजी सहायक संजय यादव ने भी स्पष्ट किया है कि भय्यू महाराज ने राज्यमंत्री का पद स्वीकारने से इन्‍कार कर दिया है.




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