दो लाख करोड़ के कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने विज्ञापन में लुटा दिये जनता के 6.4 अरब रूपये


''सरकार ने ऐसे मीडिया संस्थानों को उपकृत किया, जो सिर्फ भाजपा के लिए पत्रकारिता करते हैं। राऊ से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने उन सभी संस्थाओं की सूची मांगी थी, जिन्हे विज्ञापन दिए गए परंतु सरकार ने यह लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई, केवल इतना बताया कि 5 साल में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 300 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए गए।''

@ संजय सक्सेना
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी का आक्रामक रवैया पूरी तरह कायम है। राऊ से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी लगातार कुछ अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहे है जिससे प्रदेश सरकार चुनावी साल में प्रश्नों के सही उत्तर देने से भी डरने लगी है। इस मामले को लेकर विधायक पटवारी ने कहा कि नियमों की मनगढंगत व्याख्या करके विधानसभा प्रश्नों को सीमित किया जा रहा है और कई सवालों को रिजेक्ट भी किया जा रहा है। पटवारी का यह भी कहना है कि अपनी नाकामियां छिपाने के लिये सरकार विधानसभा में सवालों के सही उत्तर देने से बच रही है।

सवालों के सही उत्तर नहीं देने के बावजूद जीतू पटवारी के एक प्रश्न पर सरकार द्वारा दिए गये जवाब पर सरकार ही बुरी तरह घिर गई, जिसके बाद अब इस मामले को दबाने के लिए पूरी सरकार पटवारी पर निशाना साध रही है, लेकिन यह मामला सरकार के गले की हड्डी बन गया है।

यह है मामला 
कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने एक सवाल के जरिए शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार से पूछा कि बीते पांच वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार और विशेष अवसरों के प्रचार के लिए कुल कितनी राशि खर्च की गई। इस सवाल का जवाब देते हुए जनसंपर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि "बीते पांच वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार पर कुल 1,19,99,82,879 रुपये की राशि खर्च की गई। डॉ. मिश्रा ने बताया, "विशेष अवसरों के प्रचार पर 1,95,43,72,353 रुपये के विज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दिए गए।

जनसंपर्क मंत्री डा. मिश्रा द्वारा सदन में दिए गए जवाब और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को पांच वर्ष की अवधि में दिए गए विज्ञापन पर व्यय हुई राशि को जोड़ें तो वह 3,15,43,55,232 रुपये होती है। जीतू पटवारी का आरोप है कि उन्होंने उन संस्थानों की सूची मांगी थी, जिन्हें विज्ञापन जारी किए गए हैं, मगर वह सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।

विधायक पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने ऐसे मीडिया संस्थानों को उपकृत किया जो सिर्फ भाजपा के लिए पत्रकारिता करते हैं। पटवारी ने उन सभी संस्थाओं की सूची मांगी थी, जिन्हे विज्ञापन दिए गए परंतु सरकार ने यह लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई, केवल इतना बताया कि 5 साल में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 300 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए गए।

सरकार ने रचा यह षड्यंत्र 
इस मामले को लेकर सदन में विधायक पटवारी नर्मदा सेवा यात्रा के प्रचार के लिए दिए गए विज्ञापन के खर्च पर दो अलग-अलग उत्तरों से संतुष्ट नहीं थे। जब सत्ता पक्ष से सही उत्तर नहीं मिला तो पटवारी ने सदन में कह दिया कि- “ये चोरों की मंडली है, चोरों को विज्ञापन देते हैं, यह उत्तर नहीं दे रहे”, जिसे अध्यक्ष ने विलोपित करवा दिया। जबकि अपने बयान में कहीं भी जीतू ने मीडिया शब्द का उपयोग ही नहीं किया, लेकिन जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे मीडिया से जोड़ते हुए सदन में पांच बार दोहराया कि “ये मीडिया को चोर कह रहे है, इन्होंने मीडिया को चोर कहा है।”

वहां उपस्थित लोगों को समझ में यह नहीं आया कि मीडिया को चोर कौन कह रहा था, जीतू पटवारी या फिर मंत्री महोदय।जीतू पटवारी ने चर्चा के दौरान एक बार फिर अपनी बात कही इस बार उन्होंने कहा कि- “अंधा अंधे को रेवड़ी बांटे. जर्नलिज्म वाले परेशान है,चोरों का एक गिरोह बन गया है.. जो ओरिजनल जर्नलिज्म वाले हैं वह परेशान है।”

साफ तौर पर कहा जाए तो सरकार 300 करोड़ के विज्ञापन को लेकर हुए खुलासे को दबाने के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है और मीडिया का भी ध्यान भटका कर उनके समक्ष पटवारी के बयान को गलत तरीके से पेश कर रही है। इसे लेकर आज विधानसभा में भाजपा विधायकों द्वारा विशेषाधिकार हनन की सूचना पर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी-नोकझोंक और हंगामा हुआ। हंगामे के चलते अध्यक्ष को विधानसभा की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित करना पड़ी।





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