सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ा जा रहा है रतलाम को, पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी बैठे धरने पर



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''जिन्दगी बीत जाती है एक घर बनाने में 
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां उजाड़ने में'' कुछ इसी प्रकार की बात को लेकर अपनी ही BJP सरकार के खिलाफ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी मौन धरने पर बैठ गए हैं. 

रतलाम. पूरे शहर में ग़लतफ़हमी का वातावरण है कि अतिक्रमण तोडा जा रहा है और रोड की चौड़ाई 104 का विरोध है, जबकि न तो जो मकान तोड़े गए वे अतिक्रमण में थे और रोड की कुल चौड़ाई मय नाली, devider और सर्विस लेन के भी 80 फ़ीट ही हो रही बताई जाती है तो फिर अतिक्रमण के नाम पर यदि आप किसी का निजी मकान तोड़ते भी हैं, तो कम से कम अधिग्रहण तो करे, मुआवजा तो दे और फिर उसे खाली न छोड़ते हुए निर्माण भी करें. यह कहना है राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी का. और अब वे इस प्रकार की गलत कार्यवाही के विरोध में अपनी ही BJP सरकार के खिलाफ मौन धरने पर बैठ गए हैं. 

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रतलाम शहर के घनी आबादी और परम्परागत भाजपाई समर्थित क्षेत्र में फोरलेन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई को पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने गैर जिम्मेदाराना और प्रशासनिक निरंकुशता करार दिया है. श्री कोठारी का सवाल है कि बिना तोड़फोड़ के भी यदि योजना का वांछित लक्ष्य हाँसिल हो रहा था? तो प्राथमिकता क्या होना चाहिए? यदि आपने तय कर लिया कि बगैर सुनवाई के बिना ही कार्यवाही करना है, तो कौन रोक सकता है? 

उनके अनुसार न्यायालय के फैसले की मनमानी व्याख्या की गई. निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए नियम है. उनका कोई पालन नही हुआ. राज्य शासन को जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) भेजी गई इसके विपरीत सड़क का निर्माण हो ही नही सकता. अब डीपीआर में यदि नही है तो फिर किसके भले के लिए तो निजी मकान तोड़े जाने की कयावद हो रही है. आगे बनने वाले सागोद रोड ओव्हरब्रिज की डीपीआर में कितनी चौड़ाई रखी गई है. फोरलेन भी वरोठ माता मंदिर तक ही है. एमओएस छोड़कर निर्माण नही करने की बात पर पूरे रतलाम में बमुश्किल 10 से ज्यादा बंगले ही इस नियम का पालन करते मिलेंगे. एमओएस को आधार बनाकर पूरे शहर के भवनों में तोड़फोड़ होती है, तो शायद कोई रहवासी भवन को छोड़ दे, इस आधार पर तोड़फोड़ करने पर पूरा शहर जर्जर हो जाएगा.

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ये वो महिला है, जिसने आज अपना मकान भी खोया और प्रशासन के हाथों मार भी खाई.


104 फिट की रोड बनाने और अतिक्रमण तोड़ते के नाम पर बुल्डोजर चलाया, लेकिन निजी मकान औऱ दुकान को बचाने के लिये परिवार की महिला सड़क पर लेट गई और अपने हक के लिये रोने लगी, उसी मकान का जिनके पास स्टे था 22×50 के मकान पर कोर्ट द्वारा स्टे था उच्च न्यायलय जज साहब के फैसले की भी नही मानी गई. कहते हैं प्रशासन तो समाज की भलाई के लिए होता है, पर यहाँ ठीक विपरीत काम करता दिखा.

रतलाम से आकाश कोठारी  






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