हम तुम !

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बांसुरी सितार हुए
हम तुम !
मिल के त्यौहार हुए
हम तुम !

महके हैं बहके हैं
दिन अपने टेसू से चहके हैं,
फागुनी बयार हुए
हम तुम !
बजती हैं सजती हैं लगतीं हैं,
मेंहदी सी हर शामें रचती हैं,
सिन्दूरी प्यार हुए
हम तुम !
गीतों से गजलों से, कविता से,अनबोले नैनों की मदिरा से,
रस की बौछार हुए
हम तुम !!!


रामकुमार वर्मा, भोपाल 

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