कभी धमकी और कभी आश्वासन, अब 'घंटे पे आदेश'




''संविदा कर्मचारियों को बार बार कभी धमकी और कभी आश्वासन देना मामले को लटकाए रखना कोई हल नहीं निकलना मध्यप्रदेश सरकार को भारी पड़ गया है.''

हाल में आज अंतिम चेतावनी के जबाब में संविदा कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त नहीं की बल्कि, सरकार के अल्टीमेटम को 'घंटे पे आदेश' के रूप में बता कर अपने सख्त तेवर दिखा दिए हैं. अब लड़ाई आर पार की हो गई है. 

परिणाम क्या होगा सब जानते हैं. खुद सरकार भी कहती रही है की बिना रोये एक मां भी अपने बच्चे को दूध नहीं पिलाती. सो दूध तो पिलाना पडेगा, लेकिन इसके पहले इस प्रकार का 'घंटे पे आदेश' से सरकार की भद पिट रही है. 

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिए गए सरकार के तीसरे अल्टीमेटम का आज आखरी दिन था. कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे. उल्टा इंदौर, जबलपुर में हड़ताली कर्मचारियों ने एक बैनर टांग दिया है, जिस पर लिखा है 'घंटे पे आदेश'. संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मप्र के प्रांताध्यक्ष सौरभ सिंह चौहान ने हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है. आन्दोलनकारियों का साफ कहना है, जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी काम पर नहीं लौटेंगे. 




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