'हिन्दू को मुसलमानों से, मुसलमानों को हिन्दू से खतरा तो होगा ही' चुनाव जो सर पर हैं



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वाकई देश बदल रहा है. जहाँ वर्षों से बहुत ही भाई चारे के साथ हिन्दू-मुस्लिम रहते आये हैं, अब गंदी राजनीति करने वाले उनमें यह जहर भरने में कामयाब दिख रहे हैं कि 'हिन्दू को मुसलमानों से खतरा है' और 'मुसलमानों को हिन्दू से खतरा है.'

सोशल मीडिया पर एक यह कहानी खूब वायरल हो रही है. आप पहले इसे ही पढ़ लीजिये. फिर बात करते हैं मुद्दे की.

एक बार किसी राज्य के राजा ने एक भिखारिन से शादी कर ली. राजा भिखारिन से अत्यंत प्रेम करता था. उसने उसके लिए दासियों की फौज खड़ी कर दी. खाने के लिए रोज पकवान. सोने के लिए शाही बिछौना. गद्देदार पलँग. हर सुख सुविधा.. !!

लेकिन कुछ दिनों में रानी साहिबा बीमार पड़ने लगी. बिस्तर पकड़ लिया. राजा ने चिंतित होकर एक से बढ़कर एक वैद्य बुलाए, लेकिन रानी ठीक न हो सकी.

एक बूढ़ा इलाज हेतु राजा के पास पहुंचा. पूरी बात सुनने के बाद बूढ़े ने कहा, "महाराज, रानी साहिबा का शाही बिछौना हटाकर जमीन पर चटाई लगाई जाए. दासियों को तुरन्त हटा दिया जाए. रानी साहिबा को बासी और बचा खुचा खाना दिया जाए.

राजा को बूढ़े की बात सुन बड़ा अचरज़ हुआ, किंतु वैसा ही किया गया. 7 दिनों के अंदर ही रानी साहिबा टनटनाट होकर, पूर्ण स्वस्थ हो गई.

इस कहानी से सन्देश दिया जा रहा है कि UP में फूलपुर, गोरखपुर में योगी जी ने ताबड़तोड़ काम किए. भ्रष्टाचार कम कर दिया. बोर्ड परीक्षा की नकल रोक दी. 80% सड़को के गड्ढे भर दिए. 14 सालो बाद मोहर्रम बिना हिंसा के बना. होली बिना डर के धूमधाम से मनी. दिवाली पर पहली बार अयोध्या जगमगाया. जंगलराज से मुक्ति मिली. अपराधी बिलों में छुप गए. और योगी जी ने सिर्फ 1 साल में यह सब कर दिया. बस यही योगी जी ने गलती कर दी.
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बेमेल गठबंधन ने हराया 
कहानी के माध्यम से कहा जा रहा है जनता को 14 साल से भृष्टाचार की आदत पड़ी हुई है, बच्चों को नकल से पास कराने की आदत हो गई है. जिस जनता को सड़क के गड्डो पर उछलने की आदत लगी हो. जिन्हें मोहर्रम पर हिंसा में अपने घर जलवाने, दुकान तुड़वाने में चैन मिलता हो. वे लोग तो आपके कामो के बाद बीमार पड़ेंगे ही. अतः योगी जी, ये राजनीति है. बदलाव लाइये. यहां कुत्ते को एकदम से 'घी' हजम नहीं होता. उड़ेल दिया फूलपुर, गोरखपुर में. बाकी हम राष्ट्रवादी हमेशा की तरह आपके साथ हैं. 
अरे! राष्ट्रवादी भाईयो, कम से कम अपने को, खुद को तो कुत्ता मत कहो.

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इस प्रकार से यह कहा जा रहा है 'अगर शेर के पाँव में कांटा चुभ जाए तो इसका ये मतलब नहीं कि अब कुत्ते राज करेंगे.' और 'यह हार भाजपा या मोदी की नहीं, बल्कि यह हार हिन्दुओं की हार है. और वो दिन दूर नहीं, जब हिन्दुओं का वो हश्र होगा कि हिन्दू अपने को हिन्दू कहने से घबराएंगे.' कहा जा रहा है '2019 में मोदी को हराने के लिए जब सारा विपक्ष एक हो सकता है तो क्या मोदी को जिताने के लिए सारे हिन्दू एक नहीं हो सकते?'

'पकिस्तान जिन्दावाद..' BJP IT सेल के बन्दे का कमाल तो नहीं?  
इसी के साथ हाल में अररिया उपचुनाव में RJD प्रत्याशी सरफराज की जीत पर निकले विजय जुलूस में 'पाकिस्तान जिन्दावाद' और 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' के नारों को लेकर भी कुछ इसी प्रकार की बातें कही जा रही हैं कि 'देश में यदि BJP हारी तो हिन्दुओं की खैर नहीं..', लेकिन कहीं से भी यह बात नहीं उठ रही कि इस बात की जांच कराई जाए कि ये हरकत किसने की, और देश में बार बार ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं यह IT सेलों का कमाल तो नहीं? जैसा कि BJP IT सेल के बन्दे ने बाहर आकर बताया.
देखिये वह खबर, वीडियो  BJP IT सेल के बन्दे महादेव का.


और बात करें देश बदल रहा है कि तो वाकई देश बदल रहा है. जहाँ वर्षों से बहुत ही भाई चारे के साथ हिन्दू-मुस्लिम रहते आये हैं, अब गंदी राजनीति करने वाले उनमें यह भरने में कामयाब दिख रहे हैं कि 'हिन्दू को मुसलमानों से खतरा है' और 'मुसलमानों को हिन्दू से खतरा है.'

मैदान में लाश देख कर जैसे गिद्द मंडराने लगते हैं, ठीक वैसे ही चुनाव आते ही कुछ इस तरह के मुद्दे उछाले जाने लगते हैं. ऐसा लगता है कि हाल में कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनावों को देखते हुए यह सब किया जा रहा है. साथ ही  2019 भी दूर नहीं है, सो हमें यह सब  2019 तक झेलना होगा. 

केंद्र की BJP सरकार इस बात को कतई मानने तैयार नहीं है कि नोटबंदी, GST या माननीय पीएम साहेब का पकौड़े वाला बयान और अमित शाह का स्वीकारना कि '15 लाख की बात जुमला था', उसकी हार की प्रमुख बजह है. और उसे देश में इस प्रकार का गलत माहौल बनाने की जगह देश की वास्तविक समस्याओं के निराकरण में रूचि दिखानी चाहिए. 

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भ्रष्टाचार चरम पर, सरकार बनी तमाशबीन  
देश में भ्रष्टाचार चरम पर है. पहले अंग्रेजों ने लूटा, अब देश के लोग ही देश को लूट कर बाहर जा रहे हैं और सरकार तमाशबीन बनी हुई है. अपराधियों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं और सरकार अपराधियों को छुड़वाना हमारी मजबूरी बता रही है, जैसा कि मध्यप्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा. देश में महिला अपराध बेतहाशा बढ़े हैं, और मध्यप्रदेश सरकार के ही गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह, यह कह कर कि अन्य प्रदेश की तुलना में मध्यप्रदेश में महिला अपराध कम हो रहे हैं, अपने को साफ़ बताने की कोशिश कर रहे हैं. 

वास्तविक समस्याओं की बात करें तो शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति बेहद गंभीर है, कोई सुनने वाला नहीं है. न्यायालय की चौखट पर दम तोड़ रहा है आम आदमी. 

दुनिया की सैर से देश को क्या मिला? 
अपव्यय कम करने की बात करें तो इस दिशा में कोई काम नहीं किया गया, बल्कि अपव्यय बढ़ गया है. बड़े नेता और अधिकारी दुनिया घूम रहे हैं, और उससे देश को क्या मिला, बता नहीं पा रहे हैं. विधायक को सांसद बना कर या सांसद को मुख्यमंत्री बना कर उनकी खाली हुई सीटों पर उपचुनाव करवाना क्या फालतू खर्च नही है? महंगाई, GST सहित कई और प्रकार से बोझ आम आदमी के कंधे पर डाल दिया गया है. 

BJP द्वारा बुआ-भतीजे के रूप में बेमेल गठबंधन की बातें भी खूब की जा रही हैं. जैसा कि UP के मुख्यमंत्री योगी जी ने कहा. लेकिन BJP अब अपनी स्थिति भी देख ले, जो कि वैसी ही हो गई है. लोकसभा में BJP की वास्तविक संख्या 271 है, यानि बहुमत से एक कम. 2014 में बीजेपी की अपनी संख्या 282 थी और NDA के 48 सहयोगी दलों को मिला कर ये संख्या 331 है. 2017-18 में BJP सभी उपचुनाव हारी. 2017 में हुये उपचुनाव में अमृतसर, श्रीनगर, मल्लापुरम और गुरदासपुर बीजेपी लड़ी और हारी. हार का सिलसिला 2018 में भी जारी है और BJP गोरखपुर, फूलपुर, अररिया, अजमेर, अलवर और उलबेरिया (पश्चिम बंगाल) के उपचुनाव हार चुकी है.  

केंद्र की BJP, सॉरी NDA सरकार में  गठबंधन की राजनीति तो अब शुरू होगी. चंद्रबाबू नायडू और उद्धव ठाकरे लगभग किनारा कर चुके हैं. उद्धव कभी खुद तो कभी शिव सेना सांसद संजय राऊत या अपने अखबार सामना के जरिये मोदी की हवा निकालते रहे हैं. और नायडू ने तो अपने मंत्री सरकार से निकाल ही लिए हैं. 

अब मोदी सरकार को कोई भी बिल लोकसभा में पास कराने के लिए विपक्ष से पहले अपने ही सहयोगी दलों से मानमुनव्वल और सौदेबाजी करनी होगी और अब इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि मोदी, वाजपेयी नहीं हैं कि 48 पार्टियों के गठबंधन को चला पाये. जिस हेकड़ी के साथ वो अब तक सरकार चलाते रहे हैं, अब उसके लिए उनके पास संख्या बल नहीं है. माना जा रहा है कि देश में लोकतंत्र के सेहत के लिए मोदी जैसे नेता के उपर गठबंधन की नकेल ज़रूरी भी है. 

वापसी नहीं, सम्मानजनक हालत की चिंता करो  
4 साल हो गए राम मंदिर क्यों नहीं बना अभी तक? धारा 370 हटाने की बात का क्या हुआ? कह रहे हैं 'राम मंदिर बनेगा, पर 2019 के बाद बनेगा', मतलब एक बार और जिताओ. गलतफहमी निकाल दो, आपका समय अब ख़त्म हो रहा है. अनुमान है कि अगर 2019 के आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी मिलकर चुनाव लड़े तो 80 में से 50 सीट पर जीत हासिल कर सकते हैं. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में BJP के हालात 2014 जैसे अब नहीं हैं. इन हालात में 2019 में BJP की वापसी तो क्या, वह सम्मान जनक हालत में नहीं रहने वाली.

चित्रांश 



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