डराने का काम कर रही है सरकार, काम पर लौटे तो महिला ब्रिगेड ने पहनाईं चूड़ी




''एक ओर मुख्यमंत्री स्वीकार करते हैं कि संविदा नीति अन्यायपूर्ण है. और मैं किसी को संविदा कर्मी नहीं रहने दूंगा. दुसरी ओर सरकार संविदा कर्मियों के हक़ में कोई फैसला नहीं ले रही बल्कि उन्हें डराने के काम कर रही है.''

संविदा कर्मचारियों की हड़ताल को आज 34 वां दिन है. हड़ताल पूरे जोर पर है. सरकार को बार बार अपने ही आदेश पलटने पड़ रहे हैं. ऐसे में लंबा समय हो जाने और सरकार द्वारा प्रेशर बनाने के कारन कुछ संविदा कर्मी टूटने लगे हैं. इस पर संविदा कर्मचारी संघ निगाह रख रहा है और कहीं भी कोई ऐसी स्थिति बनती है तो वह एक्शन ले रहा है. इसका एक उदाहरण पन्ना में देखने को मिला. यहाँ हड़ताल के समय ऑफिस में काम कर रहे एक संविदा कर्मचारी को पन्ना में महिला ब्रिगेड ने चूड़ियाँ पहनाईं. 

हड़ताली संविदा कर्मी का कहना रहा कि 'हम लोग क्या बेवकूफ हैं, जो हड़ताल कर रहे हैं. और यदि नहीं होना परमानेंट तो लिख कर दे दो कि नहीं होना परमानेंट, हम तो संविदा पर ही काम करेंगे.' देखें वीडियो - 


स्वास्थ्य विभाग द्वारा संविदा कर्मचारियों की हड़ताल कर्मचारियों को अंतिम चेतावनी देकर दिनांक 3/3/18 तक का समय निर्धारित किया था, किन्तु किसी जिले से एक भी कर्मचारी ने तय दिनांक तक ज्वाईन नहीं किया, तदोपरांत पुनः अंतिम तिथि बढ़ाकर 12 मार्च कर दी गई, किन्तु तब भी एक भी संविदा कर्मी ने ज्वाईन नहीं किया, जिस पर शासन स्तर से डराने की पुनः कार्यवाही कर सामुहिक संविदा सेवा समाप्त करने का पत्र जारी कर डराने का पूर्ण प्रयास किया, जो असफल हो गया. 

छिन्दवाड़ा में संविदा कर्मी फांसी लगाने का प्रदर्शन करते हुए 
..और एक मजे की बात है कि आज फिर से एक तरफ सामुहिक सेवा समाप्त कर दिये गये संविदा कर्मियों को दिनांक 27/3/18 का समय दे दिया गया, जो मजाक बनकर रह गया है? यह बताते हुए संविदा कर्मियों का मानना है कि अबकी कोई ज्वाईन नहीं करेगा तो सरकार अत्यधिक प्रेशर में आ जायेगी. अंततः परिणाम स्वरूप बैकफुट पर आकर नियमितीकरण का आदेश जरूर दे देगी. 

रतलाम में  निकाली गई सरकार की संविदा नीति की अर्थी 
संविदा कर्मी राकेश पडियार रतलाम का कहना है कि साहस और दृढ़ संकल्प आप सभी ने पिछले दो आदेशों की धज्जियां उड़ाने में दिखाया था, वही इस बार भी दिखाएंगे. हमारी लड़ाई किसी भी छोटे-मोटे उद्देश्य को लेकर कभी नहीं थी, मुख्यमंत्री महोदय ने खुद स्वीकार किया है कि संविदा नीति अन्यायपूर्ण है, जिससे सिद्ध होता है कि हमारी लड़ाई एक अन्याय के विरुद्ध है और हम इस अन्याय को जड़ से मिटाकर रहेंगे.

जबलपुर में निकाली गई कफ़न रैली 
उल्लेखनीय है कि पूर्व में रतलाम में संविदा कर्मी सरकार की संविदा नीति की अर्थी निकाल चुके हैं, तो वहीं जबलपुर में कफ़न रैली भी निकाली गयी है. छिन्दवाड़ा में संविदा कर्मी फांसी लगाने का प्रदर्शन कर अपनी स्थिति बता रहे हैं. देखें वीडियो -  






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