गाय के नाम पर कोरी राजनीति कब तक होती रहेगी?

Image may contain: sky, outdoor and nature

''जिस समाज में जिंदा इंसानों के लिए सम्वेदनाएं नहीं हों, उस समाज से मूक पशु के लिए सम्वेदनाओं की उम्मीद नहीं की जा सकती है. आज गाय सिर्फ राजनीतिक और खुद की पब्लिसिटी का सब्जेक्ट बन कर रह गयी है, इसके अलावा कुछ भी नहीं. सवाल... तो क्या गाय माता सिर्फ राजनीति चमकाने के काम ही आती रहेगी?'' 

मैंने पहले भी लिखा था. आज फिर लिख रहा हूँ, आजकल 'गाय बचाओ अभियान' बड़ी तेजी से चल रहा है, लेकिन जो पैसा अभियान में खर्च हो रहा है, वही अगर गायों पर खर्च होता तो गायों की ये हालत  न होती. 

उपाय पर कोई नहीं जाता और न उनके पास कोई उपाय है, सिर्फ यात्राये निकालने, सभाएं करने, भाषण देने के. लेकिन उपाय है, हल है.... ऐसी गायों को जो लावारिस मिलती हैं, उन्हें पच्चीस-पचास बीघा की जगह में जिसे सरकार उपलब्ध करवाए या खुद करे और जगह जो कबर्ड हो, जहाँ चारे पानी की ब्यबस्था हो, वहां रखा जाना चाहिए. गाय के गोबर से खाद बने, घास भी वहीं उगाया जाए, और उनकी देखभाल के लिए भी लोग रखे जाए. गाय बोझ नहीं होगी, उसका खाने का खर्च, देशी खाद से ही निकल आएगा.

लोगों ने यात्रायें निकालीं, नौटंकी भी खूब हुई. सरकार जगह दिलवाए, मैं इसे हकीकत में बदल सकता हूँ. आपको एक गाय भी सड़क पर नहीं दिखेगी. बाकी सब फोकट की राजनीति गाय के नाम पर करते हैं, जितना पैसा जुलूस और सभाओं और गाय के नाम पर यात्राओं में खर्च होता है, अगर वह गाय पर ही खर्च हो जाये तो हालत सुधर जाए. गौ सेवक, गौ रक्षक, सब मिलकर प्रयास करें, हल सम्भव है. 

मुद्दे पर अजय कटारे जी का कहना है कि ''जिस समाज में जिंदा इंसानों के लिए सम्वेदनाएं नहीं हों, उस समाज से मूक पशु के लिए सम्वेदनाओं की उम्मीद नहीं की जा सकती है. आज गाय सिर्फ राजनीतिक और खुद की पब्लिसिटी का सब्जेक्ट बन कर रह गयी है, इसके अलावा कुछ भी नहीं.''
सवाल 
... तो क्या गाय माता सिर्फ राजनीति चमकाने के काम ही आती रहेगी? 

विदिशा से मनोज कौशल सोनी 
9630963757

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc