प्रमोशन का तर्क बेतुका, रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पीछे पैसे की कमी है असली बजह, और फिर 2 साल बाद कौन जाने किस की सरकार रहे?



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मध्यप्रदेश में शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष की जगह अब 62 वर्ष होगी. 'मीट टू प्रेस' कार्यक्रम में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की. उनका कहना था कि कोई भी कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर्ड न हो. इसके लिए सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का फैसला लिया है.

घोषणा को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीँ सरकार की रिटायर्ड अधिकारियों को वापिस सेवा में लेने, संविदा नियुक्ति देने जैसे फैसलों के बाद अब रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने से प्रदेश के युवाओं में नाराजगी देखी जा रही है. युवा वर्ग का कहना है कि वैसे ही लम्बे समय से नौकरी नहीं मिल रही हैं. प्रधानमंत्री पकौड़े तलने जैसी बातें करते हैं और अब रही सही कसर प्रदेश सरकार रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर हमारे सारे हक़ ख़त्म कर रही है. 

दूसरी और सरकारी कर्मचारी भी सरकार की कार्यप्रणाली से खासे असंतुष्ट हैं. कई कर्मचारी अधिकारी वीआरएस की तैयारी में हैं. कहा जा रहा है कि सरकार की माली हालत ठीक नहीं लग रही सो अब प्रमोशन याद आ रहे हैं. और यह बेतुका तर्क दिया जा रहा है. कहा जा रहा है 14 साल से प्रदेश में सरकार क्या कर रही थी, तब प्रमोशन की बात क्यों नहीं की? और तब से अब तक कितने रिटायर्ड हो गए, उनका क्या? 

माना जा रहा है कि असल में रिटायरमेंट पर देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है सो वह एक तीर से दो निशाने लगा रही है. एक तो कर्मचारियों को खुश करना चाहती है, दुसरे पैसा बचा रही है. और फिर दो साल बाद कौन जाने किस की सरकार रहे? 

आज की बात करें तो 31 मार्च को 1500 कर्मचारी रिटायर्ड हो रहे हैं. इन पर 300 करोड़ खर्च होगा. पूरे 2 साल में 18000 कर्मचारियों का रिटायरमेंट होना था, जिस पर लगभग 6600 करोड़ खर्च होना था. इसे बचाने अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है. देखें- 
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