4 साल में ये मिला, वर्ल्‍ड बैंक ने बताया GST को दुनिया की सबसे जटिल प्रणाली, टैक्स रेट कम करने की दी सलाह



Image result for GST जटिल प्रणाली

''वर्ल्‍ड बैंक ने भारत की नवीन टेक्स प्रणाली GST को विश्व की सबसे जटिल प्रणाली बताते हुए टैक्स रेट कम करने की सलाह दी है.''

विश्व बैंक का कहना है कि भारत की वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली दुनिया की सबसे जटिल कर प्रणालियों में से एक है. इसमें न केवल सबसे उच्च कर दर शामिल है बल्कि इस प्रणाली में सबसे अधिक कर के स्लैब भी हैं. वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत उच्च मानक जीएसटी दर मामले में एशिया में पहले और चिली के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है. 

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “भारतीय जीएसटी प्रणाली में कर की दर दुनिया में सबसे अधिक है. भारत में उच्चतम जीएसटी दर 28 प्रतिशत है. यह 115 देशों में दूसरी सबसे ऊंची दर है, जहां जीएसटी (वैट) प्रणाली लागू है.” भारतीय जीएसटी प्रणाली को जो चीज और जटिल बनाती है, वह विभिन्न श्रेणियों की वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होने वाली अलग-अलग जीएसटी दरों की संख्या है.

पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में भारत
विश्व बैंक ने बुधवार को इंडिया डेवलपमेंट अपडेट की छमाही रिपोर्ट जारी की थी. इसमें विश्व बैंक ने भारत में लागू जीएसटी को पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में रखा है. रिपोर्ट के अनुसार 115 देशों में भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है. रिपोर्ट में शामिल देशों में भारत की तरह ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू है. दुनिया के 49 देशों में जीएसटी के तहत एक और 28 देशों में दो स्लैब हैं. भारत समेत पांच देशों में इसके अंतर्गत पांच स्लैब बनाए गए हैं. भारत के अलावा इनमें इटली, लक्जम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश शामिल हैं. भारत को छोड़कर चारों देशों की अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है. 

टैक्स रेट कम करने की सलाह
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में टैक्स रेट कम करने के साथ ही कानूनी प्रावधानों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सलाह दी है. साथ ही विश्व बैंक ने टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई है. इसमें इसका असर पूंजी की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही गई है. रिपोर्ट में कर प्रणाली के प्रावधानों को अमल में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. 



Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc