ना वो था और ना ही उसके वादे





बहुत देर से वो नदी में उठती हुई लहरों को चुपचाप निहार रही थी। बस उन दोनों के बीच एक गहरी ख़ामोशी पसरी पड़ी थी। लहरों के शोर और दिल की धड़कनों में एक मौन जंग छिड़ी थी, शायद उन्हें भी लिए जाने वाले वादों और क़समों का बेसब्री से इंतजार था। तभी लड़की अचानक पूछ बैठती है... तुम मुझे कब तक यूँ ही प्यार करते रहोगे..???

लड़का अब भी शायद कही खोया हैं। लड़की उसे हौले से छूकर तन्द्रा से निकलकर लौट आने को मजबूर करती है। वो धीरे से लड़की की आँखों में झाँकता है और उसके दोनों हाथों को थाम के कहता कि जब तक इन चाँद-तारों का वजूद रहेगा, मैं तुम्हें बेइंतहा यूँ ही प्यार करता रहूँगा। इन हवाओं का वजूद जब तक वादियों में रहेगा, तुम यूँ ही मेरी साँसों में महकती रहोगी। तुम नहीं तो मैं नहीं,और मैं नहीं तो तुम नहीं.....!!!

आज लड़की उसी जगह पे पूरे 26 साल बाद फिर से आ खड़ी हुई है। दूर कही गजर ने पूरे 12 बजने की गवाही दी है। मौसम में ठंडक घुली है, आसमान सितारों की चादर ओढ़े अब भी मुस्कुरा रहा था, हवाएं शायद ये जताना चाहती थीं कि वो भी अब तक वैसे ही महक रही है। नदी में अब भी लहरें अपने जिंदा होने का सबूत दे रही थीं। बस फ़र्क इतना सा था कि ना वो था और ना ही उसके वादे..

@ श्रीमती लक्ष्मी गामड़ 
        संयुक्त कलेक्टर, रतलाम 



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