मोबाइल टावर, बढ़ा रहे बीमारियों का नेटवर्क





विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी पर विशेष 
तामिया से नितिन दत्ता की खास रिपोर्ट

देश के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की गाईडलाइन के मुताबिक स्कूल अस्पताल और आबादी क्षेत्रो मे मोबाइल कंपनियो के टॉवर नही लगाये जाने के बाद भी तामिया में निजी मोबाइल कंपनिया आबादी इलाको में स्कूल के पास टॉवर खडा कर रही है, वही मोबाइल रेडियेशन से कैंसर की जानकारी से अंजान भूमि स्वामी महज किराये मे मिलने वाले कुछ हजारो रूपये के लिये टॉवर लगाने अपनी जमीन दे रहे है. आदीवासी बहुल इलाके तामिया मे कैंसर से पहले हुई कई मौतो के बाद भी लगातार कर्क रोग के मरीज भढ रहे है रेडयेशन भी कैंसर का अहम कारक माना जाता है. वही ग्राम पंचायत जैसे स्थानीय निकाय भी बिना जानकारी के अनापत्ति प्रमाण पत्र दे रहे है.

तामिया के पांडुपिपारिया मे सतपुडा इंटरेंशनल पब्लिक स्कूल के पास रिलायंस जिओ कंपनी का मोबाइल टॉवर खडा किया गया है पेट्रोल पम्प संचालक व्यवसायी यशवंत सिंह कौरव ने बताया कि स्कूल के पास मोबाइल टॉवर होने से स्कूली बच्चो के स्वास्थ को खतरा हो सकता है इसके लिये जिला प्रशासन को कार्यवाही करना चाहिये.

एक ताजा अध्ययन के अनुसार मोबाइल फोन के लिए लगाए ऊंचे टावरों से पैदा होने वाला विकिरण आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है. मोबाइल फोन के टावर से पैदा होने वाले विकिरण से जो बीमारियों हो सकती हैं उनमें सिरदर्द के अलावा थकान, याददाश्त में कमी और दिल व फेफड़ों की बीमारियां शामिल हैं. डॉ कुलदीप भावरकर ने बताया कि  "टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें कोशिकाओं को नष्ट कर कैंसर पैदा करने में सक्षम हैं. इससे दिल की बीमारियां भी पैदा हो सकती हैं."टावर के आसपास रहने वाले लोग चौबीसों घंटे विकिरण की जद में रहते हैं. इससे उन लोगों को खासकर बहरापन, अंधापन और मेमोरी लॉस होने की आशंका ज्यादा है." वह कहते हैं कि विकिरण का ब्रेन ट्यूमर से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए अभी और विस्तृत अध्ययन जरूरी है. 

विश्वास का कहना है कि ऐसे अध्ययनों के होने तक मोबाइल फोन के टावरों को ज्यादा आबादी वाले इलाकों में लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. पांडुपिपारिया मे कई स्कूल के पास मोबाइल टावर लगाने को लेकर तामिया के युवा व्यवसायी यशवंत सिंह कौरव ने विरोध शुरू कर दिया. वही आम लोगो पब्लिक का कहना था कि बिना जांच पड़ताल के घनी आबादी वाले एरिया में मोबाइल टावर लगाने की परमिशन कैसे दी जा रही है टावर की लोकेशन के पास कई स्कूल है जिससे रेडिएशन का असर बच्चों पर पड़ने का खतरा है.मोबाइल टावरों के रेडिएशन और उसके प्रभावों पर पड़ताल में पता चला कि सैकड़ों की संख्या में मानक ताक पर रख लगाए गए टावर आमलोगो बीमारियां बांट रहे हैं. मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती हैं. इस रेडिएशन से जानवरों पर भी असर पड़ता है. 

यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है. ग्रामीण अंचल में इसी वजह से मधुमक्खियां समाप्त हो गई हैं. जानकरो की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है. एंटेना के सामनेवाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं. जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है. मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में यह बात भी अहमियत रखती है कि घर टावर पर लगे ऐंटेना के सामने है या पीछे. टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है. टावर पर जितने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा.

मोबाइल टॉवर के रेडिएशन से थकान, अनिद्रा,डिप्रेशन, ध्यान भंग, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, याद्दाश्त कमजोर होना, सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ता, पाचन क्रिया पर असर, कैंसर का खतरा बढ़ जाना, ब्रेन ट्यूमर जैसे स्वास्थ सबंधी रोग नुकसान होते है.

स्कूल अस्पताल घनी आबादी वाले इलाको मे मोबाइल टॉवर नही लगाया जा सकता वही शहरो में  छतों पर सिर्फ एक एंटीना वाला टावर ही लग सकता है.  पांच मीटर से कम चौड़ी गलियों में टावर नहीं लगता, एक टावर पर लगे एंटीना के सामने 20 मीटर तक कोई घर नहीं होगा. टावर घनी आबादी से दूर होना चाहिए. जिस जगह पर टावर लगाया जाता है, वह प्लाट खाली होना चाहिए, उससे निकलने वाली रेडिएशन की रेंज कम होनी चाहिए. कम आबादी में जिस बिल्डिंग पर टावर लगाया जाता है, वह कम से कम पांच- छह मंजिला होनी चाहिए. टावर के लिए रखा गया जेनरेटर बंद बॉडी का होना चाहिए, जिससे कि शोर न हो. जिस बिल्डिंग की छत पर टावर लगाया जाता है, वह कंडम नहीं होनी चाहिए. दो एंटीना वाले टावर के सामने घर की दूरी 35 और बारह एंटीना वाले की 75 मीटर जरूरी है. मोबाइल कंपनियों को अभी लगे टावरों से उत्सर्जित विकिरण को 90 फीसद तक कम करना होगा. निर्देशों का उल्लंघन करने 5 लाख रुपए प्रति टावर जुर्माना का प्रावधान है.


2010 में डब्ल्यूएचओ की एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा है. हंगरी में साइंटिस्टों ने पाया कि जो बहुत ज्यादा सेलफोन इस्तेमाल करते थे, उनके स्पर्म की संख्या कम हो गई. जर्मनी में हुई रिसर्च के मुताबिक जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर के एरिया में रह रहे थे, उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना बढ़ गई. 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है. केरल में की गई एक रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन टावरों से होनेवाले रेडिएशन से  मधुमक्खियों की कमर्शियल पॉपुलेशन 60 फीसदी तक गिर गई है. मोबाइल टावर लगाने के लिए कई कंपनियों की एप्लीकेशन स्थानीय निका के पास आई है. इसके लिए कोई तकनीकी निरीक्षण के बाद जो सही होगा उसी को परमिशन देने की प्रक्रिया नही अपनाई जाती है. 

इनका कहना है
''कई अध्ययन रिसर्च में सामने आया है कि मोबाइल टावर के रेडिएशन से डिप्रेशन, कैंसर जैसी कई बीमारियां होती हैं. ब्रेन ट्यूमर के केसेज बढ़ने के पीछे मोबाइल टावर का रेडिएशन ही जिम्मेदार है. यूजर्स को मोबाइल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए.''
                                             - डॉ कुलदीप भावरकर, तामिया

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