पति बेरोजगार, काम धंधा नहीं, तब ये किया देवकी ने कि बन गई गाँव की रोल मॉडल




कहते हैं जहां चाह होती है, वहां ढेरों कठिनाईयों के बीच भी रास्ते निकल आते हैं. इसी उक्ति को चरितार्थ किया है देवकी बाई ने. शहडोल जिले की ग्राम कुम्हिया की देवकी बाई पढ़ी-लिखी है. उसने बताया कि पति बेरोजगार थे, काम धंधा नहीं करते थे. वह खुद पढ़ी लिखी थी. सो उसने सोचा कि क्यों न वही कुछ करे. बस फिर क्या था विचार आते ही उसने कृषि के क्षेत्र में कुछ ख़ास करने का सोचा. 

देवकी ने आजीविका के संसाधनों के विकास के संबंध में सुन रखा था, उसने इसी के माध्यम से कुछ नया करने की ठानी और सेन्ट्रल बैंक के सामाजिक उत्थान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के अधिकारियों से सम्पर्क स्थापित कर स्वरोजगार स्थापित किया और सब्जी की खेती कर आज देवकी बाई हर माह 25 से 30 हजार रूपये का लाभ अर्जित कर रही है. 

देवकी बाई ने बताया कि उसे अपनी सफलता पर गर्व है. उन्होने बताया कि आजीविका मिशन के सदस्यों के सम्पर्क में आने के बाद उसका चयन सीआरपी के रूप में किया गया. सीआरपी बनने के एक माह उपरांत उन्होने कृषि सखी कार्यक्रम के तहत शहडोल में प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के दौरान कृषि विभाग के कृषि वैज्ञानिकों ने उसे जैविक खेती, उन्नत बीज के चुनाव, कृषि यंत्रीकरण, कम लागत में कृषि से कैसे अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है, कृषि के साथ साथ और कौन सी गतिविधियों का चयन किया जा सकता है, का तकनीकी मार्गदर्शन दिया. 

देवकी बाई ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा दिये गये उन्हें आधुनिक कृषि का जानकार बना दिया. प्रशिक्षण के बाद देवकी बाई ने बताया कि उन्होने आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी अपने पति को दी और पति ने मेरे तकनीकी ज्ञान पर भरोसा कर आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाया. हमने मिलकर काम पर अमल करना शुरू कर दिया. आज सब्जी और मक्का की अंतरवर्ती खेती से उन्हे अच्छा लाभ हो रहा है. देवकी बाई ने बताया कि उन्होने अरहर की धारवाड़ पद्धति को अपनाया है तथा अंतरवर्ती खेती कर रही हैं. 

उन्होने बताया कि सब्जी और अरहर एवं मक्के की खेती से उन्हें अच्छा लाभ हो रहा है. अच्छी आय होने के कारण उन्होने सिलाई मशीन खरीदी है एवं सिलाई का प्रशिक्षण भी सेंट्रल बैंक के सामाजिक उत्थान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा लिया है. उन्होने बताया कि मेरे ज्ञान और पति की मेहनत से आज हमने आर्थिक स्वावलंबन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है. 

उन्होने बताया कि कृषि सखी के रूप में गांव के अन्य समूह और सदस्यों को भी व्यावसायिक कृषि करने का ज्ञान दे रही हूँ. गौरतलब है कि आधुनिक कृषि के गुण सीखकर ग्राम कुम्हिया की देवकी बाई कुशवाहा गांव के लगभग 300 परिवारों की आवाज और रोड मॉडल बनी हुई हैं. देवकी बाई कहती हैं कि पहले मैं अपने पति से पूंछकर कृषि कार्य करती थी, किंतु अब मैं पति को बड़े हक से कृषि की आधुनिक तकनीक की जानकारी देती हूँ.

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